ग्रुप में आरोपी सदस्य निवेश के दौरान होने वाले मुनाफे की झूठी जानकारी साझा करते थे, जिससे डॉक्टर का भरोसा जीतना आसान हो गया। डॉक्टर को एक फर्जी ट्रेडिंग एप्लिकेशन पर भेजा गया, जिसका नाम एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी के नाम से मिलता जुलता था। इसके माध्यम से जालसाजों ने डॉक्टर से बैंक अकाउंट और अन्य संवेदनशील जानकारी हासिल की। इसके बाद उन्हें कई बैंक खातों में निवेश के नाम पर धन ट्रांसफर करने के लिए कहा गया।
पीड़ित डॉक्टर ने 7 मार्च से 18 मार्च के बीच लगभग 12.3 करोड़ रुपये फर्जी प्लेटफॉर्म पर निवेश किए। इस दौरान निवेश पर मनगढ़ंत मुनाफे का प्रदर्शन कर डॉक्टर को और धन निवेश करने के लिए मजबूर किया गया। जब डॉक्टर ने और पैसा लगाने से इनकार किया, तो आरोपियों ने उनके खिलाफ संपत्ति जब्त करने की धमकी दी। इस प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर की सभी जमा पूंजी को जालसाजों ने अपने नियंत्रण में ले लिया।
घोटाले का यह तरीका अत्यंत सुनियोजित था, जिसमें व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी एप्लिकेशन का प्रयोग कर पीड़ित को लगातार प्रभावित किया गया। आरोपियों ने निवेश पर झूठे लाभ दिखाकर डॉक्टर को विश्वास में लिया और अपनी संपत्ति गंवाने के लिए मजबूर किया। यह मामला ऑनलाइन निवेश में बढ़ती धोखाधड़ी और साइबर अपराध की गंभीरता को उजागर करता है।
पुलिस और साइबर क्राइम विभाग ने अब इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में सावधानी और विश्वसनीय प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करना आवश्यक है। डॉक्टर की उम्र और अनुभव को देखते हुए यह घटना निवेशकों के लिए चेतावनी का विषय है।
