नीलेश यादव जिला ब्यूरो
नर्मदापुरम 14,अप्रैल,2026 (हिन्द संतरी ) बदलते समय के साथ शिक्षा का स्वरूप भी तेजी से परिवर्तित हो रहा है। अब शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों को रोजगार योग्य बनाने की दिशा में अग्रसर है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा संचालित व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम राज्य के लाखों छात्र-छात्राओं के भविष्य को नई दिशा दे रहा है। शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश के अपर संचालक एवं संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण नर्मदापुरम मनीष वर्मा ने बताया कि सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है कि स्कूल स्तर से ही विद्यार्थियों को कौशलयुक्त बनाया जाए, ताकि वे केवल सरकारी नौकरी पर निर्भर न रहें, बल्कि स्वरोजगार के लिए भी सक्षम बन सकें। उन्होंने कहा कि कक्षा 9वीं से ही विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ा जा रहा है, जिससे 12वीं तक पहुंचते-पहुंचते उनके पास एक मजबूत कौशल विकसित हो सके।
उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2025-26 तक प्रदेश के कुल 3367 स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा लागू की जा चुकी है। इनमें 3138 उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में 22 प्रकार के व्यावसायिक ट्रेड संचालित हो रहे हैं, जबकि 229 हाई स्कूलों में एक-एक ट्रेड संचालित किया जा रहा है। इन स्कूलों में 2629 समग्र शिक्षा अभियान, 648 पीएम श्री योजना तथा 90 स्कूल स्टार स्कीम के अंतर्गत स्वीकृत हैं। वर्तमान में राज्य के 5,95,546 छात्र-छात्राएं विभिन्न व्यावसायिक ट्रेड एवं जॉब रोल में नामांकित हैं।
श्री वर्मा ने बताया कि कक्षा 8वीं उत्तीर्ण कर 9वीं में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए यह जानना आवश्यक है कि उनके विद्यालय में कौन-कौन से व्यावसायिक ट्रेड उपलब्ध हैं। विद्यार्थियों की रुचि के अनुसार उन्हें ट्रेड चयन की सुविधा प्रदान की जाती है। व्यावसायिक शिक्षा का उद्देश्य विद्यालय स्तर से ही कौशल विकास को बढ़ावा देना है।
उन्होंने इसके प्रमुख लाभ बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों को स्कूल शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक प्रमाण पत्र प्राप्त होता है, जिससे 12वीं के बाद सीधे रोजगार पाने की क्षमता विकसित होती है और स्वरोजगार शुरू करने का आत्मविश्वास भी बढ़ता है। यह कार्यक्रम 17 सेक्टर स्किल काउंसिल से जुड़ा हुआ है तथा ग्रामीण एवं अर्धशहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है।
अंत में उन्होंने कहा कि लक्ष्य है कि मध्यप्रदेश का प्रत्येक शासकीय विद्यालय एक “स्किल हब” के रूप में विकसित हो। विद्यालय केवल डिग्री देने का माध्यम न रहकर जीवन कौशल प्रदान करने का केंद्र बने। इसके लिए विभाग एनएसडीसी, सेक्टर स्किल काउंसिल एवं उद्योग जगत के साथ सतत समन्वय स्थापित कर रहा है।
