हनुमान जी को मिला था ऐसा श्राप
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी बचपन से ही अत्यंत शक्तिशाली, तेजस्वी और चंचल स्वभाव के थे। वे अपनी दिव्य शक्तियों का प्रयोग खेल-खेल में ही करने लगते थे। कभी वे ऋषि-मुनियों के आश्रमों में पहुंच जाते, तो कभी उनकी साधना में बाधा डालते।
एक बार कई महान ऋषि-मुनि वन में तपस्या कर रहे थे। तभी बाल स्वरूप हनुमान जी वहां पहुंचे और अपनी चंचलता के कारण उन्होंने ऋषियों को परेशान करना शुरू कर दिया।ऋषियों ने पहले तो उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब वे नहीं माने, तब उन्हें क्रोध आ गया।तब ऋषियों ने हनुमान जी को श्राप दिया कि वे अपनी सारी दिव्य शक्तियों को भूल जाएंगे।
श्राप का ये था तोड़
यह श्राप पूर्ण रूप से दंड देने के लिए नहीं था, बल्कि उनके हित में ही था। ऋषियों ने यह भी कहा कि जब कोई उन्हें उनकी शक्तियों की याद दिलाएगा, तब वे पुनः अपनी शक्ति को पहचान लेंगे और उसका उपयोग धर्म के कार्यों में करेंगे।
नारद मुनि और जामवंत ने याद दिलाई थी शक्तियां
जब भगवान राम की सेवा का समय आया और सीता माता की खोज के लिए समुद्र पार करना था, तब हनुमान जी अपनी शक्ति को भूल चुके थे। उस समय नारद मुनि और जामवंत ने उन्हें उनकी शक्तियों का स्मरण कराया। तभी हनुमान जी को अपनी अपार शक्ति का बोध हुआ और उन्होंने विशाल रूप धारण कर समुद्र लांघ लिया। इसके बाद उन्होंने राम भगवान की।
