पिछले वर्ष मार्च में यात्री वाहनों की थोक बिक्री 3 लाख 81 हजार 358 यूनिट्स रही थी, जिसके मुकाबले इस साल का आंकड़ा बाजार की रिकवरी और उपभोक्ता विश्वास में सुधार को दर्शाता है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार त्योहारी सीजन से पहले खरीदारी गतिविधियों में तेजी ने भी इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
दोपहिया वाहनों के सेगमेंट में भी मजबूत उछाल देखने को मिला है। मार्च में इनकी थोक बिक्री 19.3 प्रतिशत बढ़कर 19 लाख 76 हजार 128 यूनिट्स तक पहुंच गई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 16 लाख 56 हजार 939 यूनिट्स था। ग्रामीण क्षेत्रों में मांग में सुधार और शहरी क्षेत्रों में आवागमन की बढ़ती जरूरतें इस वृद्धि का प्रमुख कारण मानी जा रही हैं।
तिपहिया वाहनों के बाजार में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस सेगमेंट की बिक्री 21.4 प्रतिशत बढ़कर 76 हजार 273 यूनिट्स तक पहुंच गई है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 62 हजार 813 यूनिट्स था। इससे यह संकेत मिलता है कि छोटे व्यवसायों और शहरी परिवहन व्यवस्था में इन वाहनों की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है।
हाल के महीनों के आंकड़े भी बाजार की मजबूती को दर्शाते हैं, जहां फरवरी में घरेलू यात्री वाहनों की बिक्री में 10.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी और यह 4 लाख 17 हजार 705 यूनिट्स तक पहुंच गई थी। लगातार दूसरी अवधि में वृद्धि यह संकेत देती है कि ऑटो सेक्टर स्थिर और सकारात्मक गति में बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2026 में इस क्षेत्र में 7 से 9 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है। इसका कारण त्योहारी मांग, नए मॉडलों की लॉन्चिंग और कुछ हद तक आर्थिक स्थिरता को माना जा रहा है। हालांकि वित्त वर्ष 2027 में वृद्धि दर घटकर 4 से 6 प्रतिशत तक रह सकती है, जिसका कारण उच्च आधार प्रभाव और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव हो सकता है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर में संरचनात्मक बदलाव भी तेजी से हो रहे हैं। बाजार में यूटिलिटी वाहनों की हिस्सेदारी लगभग 67 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो उपभोक्ताओं की प्रीमियम और आरामदायक वाहनों की ओर बढ़ती प्राथमिकता को दर्शाती है। साथ ही सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग भी इस सेक्टर को नए रूप में ढाल रही है, जिससे भविष्य में विविधता और तकनीकी बदलाव और तेज होने की संभावना है।
