समिति के अनुसार वर्तमान में सीएनजी पर लगभग 14 प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी लगती है, जिससे इसकी कीमत कई क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक हो जाती है। इस टैक्स को हटाने से सीएनजी की लागत में कमी आएगी और यह पेट्रोल तथा डीजल के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगी। इसके साथ ही सीएनजी वाहनों पर वस्तु एवं सेवा कर को घटाकर 5 प्रतिशत करने का सुझाव भी दिया गया है, जिससे उपभोक्ताओं को इस ईंधन की ओर आकर्षित किया जा सके।
यह पहल देश के उस दीर्घकालिक लक्ष्य से भी जुड़ी है जिसके तहत वर्ष 2030 तक कुल ईंधन खपत में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को 15 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि करों में राहत मिलने से न केवल सीएनजी की मांग बढ़ेगी बल्कि यह पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में तेजी से अपनाया जाएगा।
समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि सीएनजी और पेट्रोल के बीच मूल्य अंतर को बनाए रखा जाए, ताकि उपभोक्ता पेट्रोल की जगह सस्ते और स्वच्छ विकल्प के रूप में सीएनजी को प्राथमिकता दें। इससे बड़ी संख्या में परिवारों और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को सीधे आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।
वर्तमान स्थिति में कुछ राज्यों में अतिरिक्त करों के कारण सीएनजी की कीमत अधिक हो जाती है, जिससे इसकी लोकप्रियता पर असर पड़ता है। प्रस्तावित कर राहत से इस असंतुलन को दूर करने और पूरे देश में समान रूप से सीएनजी को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
इसके साथ ही सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस को भी बढ़ावा देने की दिशा में सक्रिय है। बड़ी संख्या में नए कनेक्शन जारी किए जा रहे हैं और उपभोक्ताओं को एलपीजी से पीएनजी की ओर स्थानांतरित होने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे घरेलू ऊर्जा उपयोग में स्थिरता और सुविधा दोनों बढ़ रही हैं।
देश में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक क्षेत्रों तक प्राकृतिक गैस की पहुंच सुनिश्चित की जा सके। यह नेटवर्क अब देश के अधिकांश हिस्सों को कवर कर चुका है और शहरी के साथ साथ अर्ध शहरी क्षेत्रों में भी इसकी पहुंच बढ़ रही है।
सरकार की यह रणनीति ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक लाभ के बीच संतुलन बनाने पर केंद्रित है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि इन सिफारिशों को लागू किया जाता है तो इससे देश में स्वच्छ ईंधन की खपत को नई गति मिल सकती है और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी।
