इस परियोजना के तहत कुल 3 दशमलव 39 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड सुरंग का निर्माण किया जाना है जिसमें दो प्रमुख स्टेशन भी विकसित किए जाएंगे मेट्रो अधिकारियों के अनुसार अगले दो वर्षों में इस अंडरग्राउंड कॉरिडोर को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है गहराई में सुरंग निर्माण का सबसे बड़ा फायदा यह है कि सतह पर कंपन बेहद कम महसूस होता है जिससे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भी बिना बाधा के काम संभव हो पाता है पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्नत मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए सुरक्षा और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है
प्रदेश में पहली बार दो टनल बोरिंग मशीनों का एक साथ उपयोग किया जा रहा है जो इस परियोजना को तकनीकी दृष्टि से खास बनाता है यह सुरंग ऐशबाग से सिंधी कॉलोनी के बीच बनाई जा रही है जो भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड जैसे अहम क्षेत्रों को जोड़ेगी टीबीएम तकनीक को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह संवेदनशील और घनी शहरी आबादी के नीचे भी सटीकता और सुरक्षा के साथ कार्य कर सके
भोपाल नगर निगम लोक निर्माण विभाग रेलवे पुलिस प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से यह प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहा है शहर में एम्स से करोंद चौराहे तक ऑरेंज लाइन पर काम जारी है जिसमें सुभाषनगर से एम्स तक 6 किलोमीटर लंबा प्रायोरिटी कॉरिडोर पहले से संचालित हो रहा है अब सुभाषनगर से करोंद के बीच दूसरे चरण में अंडरग्राउंड सेक्शन तैयार किया जा रहा है जहां टीबीएम को रेड सी प्लाजा के पास से आगे बढ़ाया गया है
इस अंडरग्राउंड कॉरिडोर में भोपाल और नादरा नाम के दो स्टेशन बनाए जाएंगे जिनकी लंबाई करीब 180 मीटर होगी सुरंग निर्माण पूरा होने के बाद नादरा स्टेशन के आगे 143 मीटर लंबे स्लोप के जरिए मेट्रो फिर से जमीन के ऊपर आएगी इन स्टेशनों को तीन स्तरों में विकसित किया जाएगा जहां ग्राउंड लेवल पर प्रवेश और निकास के साथ टिकट काउंटर और दुकानें होंगी कॉनकोर्स लेवल पर टिकटिंग ऑटोमेटिक गेट और प्रतीक्षालय की सुविधा मिलेगी जबकि प्लेटफॉर्म लेवल पर यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस ट्रेन प्लेटफॉर्म तैयार किए जाएंगे इस तरह भोपाल मेट्रो परियोजना न केवल शहर के यातायात को नई दिशा दे रही है बल्कि आधुनिक तकनीक और सटीक योजना के साथ भविष्य के शहरी विकास की मजबूत नींव भी रख रही है
