क्रेडिट मांग और बैलेंस शीट से मिला सपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार, बैंकों की बैलेंस शीट पहले से ज्यादा मजबूत हुई है और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में स्थिर गतिविधियों के चलते लोन की मांग बनी हुई है। खासकर नॉन-फूड क्रेडिट में लगातार वृद्धि की उम्मीद जताई गई है, जो सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत है।
मौद्रिक नीति में स्थिरता की उम्मीद
सर्वे में शामिल विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में मौद्रिक नीति में बड़ा बदलाव नहीं होगा। मौजूदा नीति ढांचा विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने के लिहाज से उपयुक्त माना जा रहा है। हालांकि, सहकारी बैंकों के कुछ प्रतिभागियों ने 25 बेसिस पॉइंट की ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना जताई है।
पीएसबी ज्यादा आशावादी, निजी बैंक सतर्क
रिपोर्ट के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसबी) भविष्य को लेकर ज्यादा आशावादी हैं। बेहतर एसेट क्वालिटी और मजबूत पूंजी स्थिति के चलते वे कॉरपोरेट लोन में बढ़ती मांग देख रहे हैं।
वहीं निजी बैंक क्रेडिट ग्रोथ को लेकर संतुलित और चयनात्मक रुख अपना रहे हैं, जबकि विदेशी बैंक कॉरपोरेट और संस्थागत निवेश पर फोकस रखते हुए मध्यम स्तर का आशावाद दिखा रहे हैं।
रिटेल और एसएमई सेक्टर बने ग्रोथ इंजन
सेवा और रिटेल सेक्टर से लोन की मांग बैंकिंग ग्रोथ का प्रमुख आधार बनी हुई है। रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स, वित्तीय सेवाएं और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ने से क्रेडिट डिमांड को बल मिल रहा है।
साथ ही, एमएसएमई सेक्टर में भी लोन की मांग मजबूत रहने की उम्मीद है, जो छोटे व्यवसायों में बढ़ती गतिविधियों और नीतिगत समर्थन का संकेत है।
क्रेडिट ग्रोथ का अनुमान 11–13%
सर्वे में करीब 46% प्रतिभागियों का मानना है कि नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ 11% से 13% के बीच रह सकती है। रिटेल लोन भी मजबूत बना रहेगा, जो बैंकिंग सेक्टर के विस्तार में अहम भूमिका निभाएगा।
साइबर सुरक्षा बनी सबसे बड़ी चुनौती
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बैंकों के सामने साइबर सुरक्षा जोखिम सबसे बड़ी चुनौती के रूप में उभरा है। डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते दायरे के साथ इस जोखिम को गंभीरता से लेने की जरूरत बताई गई है।
कुल मिलाकर, मजबूत एसेट क्वालिटी, बढ़ती क्रेडिट मांग और स्थिर आर्थिक माहौल के चलते भारत का बैंकिंग सेक्टर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है, हालांकि साइबर सुरक्षा जैसे जोखिमों पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।
