जांच के दौरान अधिकारियों को आरोपियों के बैंक खातों में संदिग्ध लेन-देन के पुख्ता सबूत मिले हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि अवैध सट्टेबाजी से अर्जित की गई लगभग 42.3 लाख रुपये की राशि वाले विभिन्न बैंक खातों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिया गया है। इन खातों में जमा रकम का स्रोत और लेनदेन का तरीका बेहद संदिग्ध पाया गया है, जिसकी अब बारीकी से वित्तीय ऑडिट की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह रकम केवल सट्टेबाजी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसे वैध बनाने के लिए कई डिजिटल रास्तों और जटिल वित्तीय माध्यमों का उपयोग किया गया था।
गिरफ्तारी के दौरान मौके से सट्टेबाजी के संचालन में उपयोग किए जाने वाले भारी मात्रा में उपकरण भी बरामद किए गए हैं। इनमें 11 अत्याधुनिक मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और हजारों की नकद राशि शामिल है। जांच में यह भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इस गिरोह के तार विदेश से जुड़े हुए हैं। एक मुख्य संदिग्ध, जिसके खाड़ी देशों में छिपे होने का संदेह है, इस पूरे रैकेट के सरगना के रूप में उभरा है। वह अंतरराष्ट्रीय ऐप्स के जरिए लोगों को मैचों पर सट्टा लगाने के लिए आकर्षित करता था और अवैध चैनलों के जरिए लेनदेन को अंजाम देता था।
मामले की गंभीरता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को देखते हुए अब जांच का दायरा काफी बढ़ा दिया गया है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि मनी लॉन्ड्रिंग के पुख्ता सुराग मिलने के बाद प्रवर्तन निदेशालय जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों को भी इस प्रकरण में शामिल किया जा सकता है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के परिजनों और सहयोगियों के बैंक खातों की भी गहन पड़ताल कर रही है ताकि इस अवैध संपत्ति के पूरे जाल का खुलासा किया जा सके। गिरफ्तार किए गए कुछ आरोपियों का पुराना आपराधिक इतिहास भी रहा है और उन पर पहले से ही जुआ अधिनियम के तहत मामले दर्ज हैं।
इस बड़ी कार्रवाई ने उन अपराधियों के बीच हड़कंप मचा दिया है जो तकनीक की आड़ में सट्टेबाजी का काला कारोबार चला रहे थे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से होने वाले किसी भी अवैध वित्तीय लेनदेन पर सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है, जिससे सट्टेबाजी के इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के कई और चेहरों से नकाब उतर सकता है।
