जानकारी के अनुसार पैरासिटामॉल पीडियाट्रिक ओरल सस्पेंशन आईपी 125mg 5ml नाम की सिरप जांच के दौरान फेल पाई गई है। यह दवा बच्चों को बुखार और दर्द में दी जाती है और सरकारी अस्पतालों में भी इसकी सप्लाई की गई थी। जैसे ही जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी सामने आई स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी अस्पतालों और चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नवीन कोठारी ने सभी संबंधित संस्थानों को पत्र लिखकर इस विशेष बैच की दवा के उपयोग और वितरण को पूरी तरह से बंद करने के आदेश दिए हैं। साथ ही अस्पतालों और क्लिनिक को अपने स्टॉक की जांच करने और संदिग्ध बैच को अलग रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी तरह से यह दवा मरीजों तक न पहुंचे।
इस दवा का निर्माण इंदौर स्थित मेसर्स जेनिथ ड्रग्स लिमिटेड द्वारा किया गया है। बताया जा रहा है कि दवा का सैंपल कुछ समय पहले जांच के लिए भोपाल भेजा गया था जहां परीक्षण के दौरान यह मानकों पर खरी नहीं उतरी। रिपोर्ट सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बिना देरी किए इसे प्रतिबंधित कर दिया।
सीएमएचओ नवीन कोठारी ने इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित जांच की प्रक्रिया अपनाई जाती है। स्टोर में रखी दवाओं का समय समय पर परीक्षण किया जाता है और एनएबीएल रिपोर्ट आने के बाद ही उन्हें उपयोग में लाया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित सिरप में क्लंपिंग की समस्या पाई गई है जिससे उसमें क्रिस्टलाइजेशन हो रहा था और यह निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थी।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह दवा पूरी तरह खराब नहीं है लेकिन तय गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरने के कारण इसे उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं माना जा सकता। फिलहाल यह दवा बाजार में उपलब्ध नहीं है और केवल सरकारी स्टॉक में ही थी जिससे स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिली है।
स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे अपने बच्चों को यह विशेष सिरप न दें और यदि उनके पास इस बैच की दवा है तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। यह घटना एक बार फिर यह संकेत देती है कि दवाओं की गुणवत्ता को लेकर सतर्कता कितनी जरूरी है खासकर जब मामला बच्चों की सेहत से जुड़ा हो।
इस कार्रवाई से साफ है कि स्वास्थ्य विभाग किसी भी तरह की लापरवाही को लेकर गंभीर है और मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। अब आगे इस मामले में विस्तृत जांच के बाद और भी कदम उठाए जा सकते हैं।
