यह घटना रॉन फिबुन जिले के वाट थेप्पानोम चुआट मंदिर में हुई जहां अंतिम संस्कार की धार्मिक रस्में पूरी होने के बाद अचानक तीन महिला डांसर्स ने ताबूत के सामने डांस करना शुरू कर दिया। बताया गया कि यह पूरा आयोजन मृतक की अंतिम इच्छा के अनुसार किया गया था। डांसर्स ने कोरियोग्राफ किया हुआ परफॉर्मेंस मंदिर परिसर के भीतर प्रस्तुत किया जिसे देखकर वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए।
मृतक के परिवार का कहना है कि वह व्यक्ति बेहद खुशमिजाज स्वभाव का था और हमेशा जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखता था। उन्होंने अपने अंतिम संदेश में यह इच्छा जताई थी कि उनकी विदाई पर रोने की बजाय लोग उनके जीवन का जश्न मनाएं। इसी सोच को सम्मान देते हुए परिवार ने अंतिम संस्कार को एक अलग रूप देने का निर्णय लिया और शोक सभा को उत्सव में बदल दिया।
बौद्ध भिक्षुओं द्वारा अंतिम प्रार्थना और मंत्रोच्चार पूरा करने के बाद यह डांस परफॉर्मेंस शुरू हुआ। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने इस दृश्य को देखा और इसे सोशल मीडिया पर लाइव भी किया गया। वीडियो सामने आने के बाद यह तेजी से वायरल हो गया और दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया।
हालांकि, इस घटना को लेकर लोगों की राय बंटी हुई नजर आ रही है। एक वर्ग का मानना है कि यह मृतक की अंतिम इच्छा का सम्मान है और जीवन को सकारात्मक तरीके से देखने का प्रतीक है। वहीं दूसरा वर्ग इसे धार्मिक स्थल की मर्यादा के खिलाफ बता रहा है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि इस तरह का प्रदर्शन खासकर मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर उचित नहीं है।
मरने वाले व्यक्ति का निधन 15 अप्रैल को हुआ था और उन्होंने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वह नहीं चाहते कि उनकी मृत्यु पर लोग दुखी हों। उनका मानना था कि मृत्यु जीवन का हिस्सा है और इसे सहजता से स्वीकार करना चाहिए। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए परिवार ने पारंपरिक शोक को हटाकर एक अलग प्रकार का अंतिम संस्कार आयोजित किया।
यह घटना न सिर्फ थाईलैंड में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गई है। जहां एक ओर इसे जीवन को सेलिब्रेट करने का तरीका माना जा रहा है वहीं दूसरी ओर सांस्कृतिक और धार्मिक मर्यादाओं को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
