उनकी फिल्मों आनंद आराधना और सफर की सफलता के बाद यह ट्रेंड साफ नजर आने लगा कि जिन फिल्मों में उनके किरदार की मौत होती है वे दर्शकों को ज्यादा भावनात्मक रूप से जोड़ती हैं। खासकर आनंद में उनका डायलॉग और किरदार आज भी लोगों के बीच अमर है। इस फिल्म में उनके साथ अमिताभ बच्चन भी नजर आए थे।
राजेश खन्ना ने इस पैटर्न को समझते हुए कई और फिल्में कीं जिनमें उनके किरदार का अंत दुखद होता है। इनमें नमक हराम अवतार और कुदरत जैसी फिल्में शामिल हैं। इन फिल्मों में उनकी एक्टिंग ने दर्शकों को भावुक कर दिया और यही उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बनी।
इसी तरह अमर दीप दर्द आपकी कसम और रोटी जैसी फिल्मों में भी उनके किरदार की मौत दिखाई गई लेकिन हर बार दर्शकों ने उन्हें भरपूर प्यार दिया। इन फिल्मों ने यह साबित कर दिया कि मजबूत कहानी और दमदार अभिनय के सामने अंत का सुखद या दुखद होना ज्यादा मायने नहीं रखता।
हालांकि उनके परिवार में हर कोई इस तरह की फिल्मों को पसंद नहीं करता था। उनकी चाईजी को उनकी ऐसी फिल्में देखना अच्छा नहीं लगता था जिनमें उनका किरदार तकलीफ झेलता या मर जाता है। बताया जाता है कि फिल्म सफर देखने के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई थी जिसके बाद राजेश खन्ना ने उन्हें ऐसी फिल्में दिखाना बंद कर दिया।
राजेश खन्ना का यह दौर भारतीय सिनेमा में एक अलग पहचान लेकर आया। उन्होंने यह साबित किया कि एक अभिनेता अपनी अदाकारी से हर तरह के किरदार को अमर बना सकता है चाहे उसका अंत कितना ही दुखद क्यों न हो। यही वजह है कि आज भी उनकी ये फिल्में क्लासिक मानी जाती हैं और नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी उतनी ही लोकप्रिय हैं।
