नए निर्देशों के अनुसार सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों को 2 मई तक अपनी अनुपालन रिपोर्ट जमा करनी होगी। इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि स्कूलों ने हीटवेव से बचाव के लिए तय किए गए सभी सुरक्षा उपायों को लागू किया है या नहीं। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि स्कूल परिसर में छात्रों के लिए साफ और सुरक्षित पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध हो।
स्कूलों में सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक वॉटर बेल सिस्टम को लागू करना है। इस व्यवस्था के तहत हर 45 से 60 मिनट में छात्रों को पानी पीने का अनिवार्य ब्रेक दिया जाएगा, ताकि शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन की समस्या को रोका जा सके। यह कदम गर्मी के दौरान बच्चों की सेहत को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाएगा।
इसके अलावा स्कूलों को अपनी दैनिक समय-सारणी में भी बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं। तेज गर्मी के समय बच्चों को लंबे समय तक धूप में रहने से बचाने के लिए आउटडोर असेंबली को कम किया जाएगा या फिर उसे इनडोर आयोजित किया जाएगा। साथ ही खेलकूद और अन्य बाहरी गतिविधियों को फिलहाल रोकने या सीमित करने की सलाह दी गई है।
छात्रों को जागरूक करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके तहत स्कूलों में छोटी-छोटी जानकारी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें बच्चों को हीट स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों और प्राथमिक उपचार के बारे में बताया जाएगा। इससे बच्चे न केवल खुद सतर्क रहेंगे बल्कि जरूरत पड़ने पर दूसरों की भी मदद कर सकेंगे।
निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बडी सिस्टम लागू किया जा रहा है, जिसमें छात्रों को जोड़ियों में रखा जाएगा। इस प्रणाली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी छात्र को कमजोरी, चक्कर या पानी की कमी के लक्षण दिखाई दें, तो उसका साथी तुरंत शिक्षकों को सूचित कर सके।
इसके साथ ही स्कूलों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे रोजाना गर्मी से जुड़ी जरूरी जानकारी और सावधानियों को माता-पिता तक पहुंचाएं, ताकि घर और स्कूल दोनों जगह बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। स्कूल परिसर में भी सावधानी से संबंधित पोस्टर और सूचना सामग्री लगाई जाएगी, जिससे छात्रों में जागरूकता बनी रहे।
