असल में यह अलर्ट Cell Broadcast Technology के जरिए भेजा गया था। यह एक वन-वे कम्युनिकेशन सिस्टम है, जिसमें मोबाइल टावर अपनी रेंज में मौजूद सभी फोन पर एक साथ मैसेज भेजते हैं। इसमें न तो इंटरनेट की जरूरत होती है और न ही किसी यूजर का मोबाइल नंबर। यही वजह है कि नेटवर्क कमजोर होने या फोन साइलेंट होने के बावजूद भी अलर्ट की तेज बीप सुनाई देती है और स्क्रीन पर पॉप-अप दिखता है।
अब सबसे अहम सवालक्या इस तकनीक से आपके फोन में कोई बदलाव किया जा सकता है? जवाब साफ है नहीं। यह तकनीक सिर्फ मैसेज भेजने तक सीमित है। इसे ‘रीड-ओनली’ चैनल माना जाता है, यानी इससे न तो आपके फोन की सेटिंग्स बदली जा सकती हैं, न ही ऐप्स, फोटो या पर्सनल डेटा तक पहुंचा जा सकता है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि आपका फोन पूरी तरह सुरक्षित है। साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, असली खतरा Spyware जैसे खतरनाक सॉफ्टवेयर से होता है। अगर किसी तरह आपके फोन में स्पाईवेयर इंस्टॉल हो जाए, तो हैकर दूर बैठकर आपके फोन को कंट्रोल कर सकता है—चाहे वह कैमरा हो, माइक्रोफोन हो या आपकी निजी फाइल्स।
यानी साफ है सरकारी इमरजेंसी अलर्ट से डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह सिर्फ आपकी सुरक्षा के लिए है। लेकिन असली सावधानी आपको संदिग्ध लिंक, अनजान ऐप्स और फर्जी कॉल्स से बरतनी होगी, क्योंकि खतरा वहीं छिपा होता है।
