भारत में Apple की सख्त ‘नो रिफंड’ पॉलिसी
Apple ने भारत में पहले ऑनलाइन स्टोर के जरिए एंट्री की थी और बाद में दिल्ली, मुंबई समेत कई शहरों में अपने ऑफिशियल रिटेल स्टोर खोले। लेकिन खरीदारी के बाद ग्राहकों को जो सबसे बड़ा फर्क देखने को मिलता है, वह है कंपनी की रिटर्न पॉलिसी।
Apple India की आधिकारिक नीति के अनुसार, भारत में खरीदे गए किसी भी प्रोडक्ट को केवल पसंद न आने या मन बदल जाने की स्थिति में वापस नहीं किया जा सकता। यानी प्रोडक्ट सही तरीके से काम कर रहा है, फिर भी ग्राहक उसे रिफंड या एक्सचेंज नहीं करा सकता।
खराब प्रोडक्ट होने पर क्या मिलेगा विकल्प?
हालांकि, अगर डिवाइस में तकनीकी खराबी निकलती है और वह वारंटी या AppleCare+ के दायरे में है, तो कंपनी सर्विस और रिपेयर की सुविधा देती है। कुछ विशेष मामलों में कंपनी डिफेक्टिव प्रोडक्ट को बदल भी सकती है।ग्राहक देशभर के अधिकृत Apple सर्विस सेंटर पर जाकर मरम्मत या सहायता ले सकते हैं।
अमेरिका में अलग हैं नियम
भारत के मुकाबले अमेरिका में Apple ग्राहकों को ज्यादा लचीलापन देता है। वहां ग्राहक डिलीवरी मिलने के 14 दिनों के भीतर प्रोडक्ट को रिटर्न या एक्सचेंज कर सकते हैं, चाहे वजह पसंद न आना ही क्यों न हो। यानी अमेरिकी ग्राहकों को “नो क्वेश्चन रिटर्न” जैसी सुविधा मिलती है, जबकि भारतीय ग्राहकों को यह विकल्प नहीं दिया गया है।
आखिर क्यों अलग हैं नियम?
Apple ने आधिकारिक तौर पर भारत और अमेरिका की अलग-अलग नीतियों का स्पष्ट कारण नहीं बताया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे बाजार की प्रकृति, ग्राहकों का व्यवहार और बिजनेस मॉडल जैसे कारण हो सकते हैं। भारत में बढ़ते प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार के बीच कई ग्राहक अब मांग कर रहे हैं कि Apple को यहां भी अमेरिका जैसी रिटर्न और एक्सचेंज सुविधा शुरू करनी चाहिए।
ग्राहकों के लिए जरूरी सलाह
अगर आप Apple Store India से कोई महंगा प्रोडक्ट खरीद रहे हैं, तो खरीदारी से पहले रिटर्न, वारंटी और सर्विस नियम अच्छी तरह पढ़ लें। इससे बाद में किसी तरह की परेशानी या गलतफहमी से बचा जा सकता है
