सिक्योरिटी रिसर्चर Alexander Hanff ने दावा किया कि Chrome यूजर के सिस्टम हार्डवेयर की जांच करने के बाद अपने आप AI मॉडल डाउनलोड करना शुरू कर देता है। अगर कंप्यूटर या लैपटॉप इस मॉडल को रन करने में सक्षम होता है, तो ब्राउजर बैकग्राउंड में भारी फाइल डाउनलोड कर लेता है। कई यूजर्स को इसका पता तब चलता है, जब उनकी स्टोरेज अचानक कम होने लगती है या इंटरनेट डेटा तेजी से खत्म हो जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, रिसर्चर ने macOS सिस्टम पर टेस्टिंग के दौरान पाया कि Chrome ने बिना किसी नोटिफिकेशन के “OptGuideOnDeviceModel” नाम का फोल्डर बनाया और करीब 14 मिनट में लगभग 4GB डेटा डाउनलोड कर लिया। बताया जा रहा है कि यह फाइल Chrome के AI फीचर्स जैसे स्मार्ट राइटिंग असिस्टेंट और ऑन-डिवाइस सर्च प्रोसेसिंग के लिए इस्तेमाल की जाती है।
दिलचस्प बात यह है कि Chrome के कई AI फीचर्स अब भी क्लाउड सर्वर पर निर्भर हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह भारी AI मॉडल हर यूजर के लिए जरूरी भी है या नहीं। टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि सीमित स्टोरेज वाले सिस्टम में यह फाइल डिवाइस की परफॉर्मेंस को प्रभावित कर सकती है।
Windows 11 यूजर्स अपने सिस्टम में इस फाइल को %LOCALAPPDATA%GoogleChromeUser DataOptGuideOnDeviceModel लोकेशन पर खोज सकते हैं। हालांकि केवल फोल्डर डिलीट करने से समस्या खत्म नहीं होगी, क्योंकि Chrome इसे दोबारा डाउनलोड कर सकता है।
इससे बचने के लिए यूजर्स Chrome में chrome://flags खोलकर “optimization-related on-device AI” सेटिंग को Disable कर सकते हैं। कुछ साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि पूरी तरह बचने का सबसे सख्त तरीका Chrome को अनइंस्टॉल करना हो सकता है।
यह मामला खासतौर पर उन यूजर्स के लिए चिंता का विषय बन गया है, जो सीमित इंटरनेट डेटा प्लान या कम स्टोरेज वाले लैपटॉप इस्तेमाल करते हैं। बैकग्राउंड में होने वाला यह डाउनलोड न सिर्फ डेटा खत्म कर सकता है, बल्कि बैटरी और सिस्टम रिसोर्स पर भी अतिरिक्त दबाव डालता है। फिलहाल यूजर्स Google की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।
