आज AI आधारित रोबोट और सिस्टम न सिर्फ कहानियां सुनाते हैं, बल्कि कुछ हद तक इंसानी व्यवहार की नकल भी करने लगे हैं। यहां तक कि पुरानी तस्वीरों और आवाजों को फिर से जीवंत करने वाली तकनीकें भी विकसित हो चुकी हैं, जिससे बिछड़े अपनों की डिजिटल मौजूदगी का अहसास कराया जा सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी प्रगति के बावजूद AI सिर्फ डेटा और प्रोग्रामिंग पर आधारित सिस्टम है, जबकि माँ का रिश्ता भावनाओं, त्याग और अनुभवों से जुड़ा होता है। माँ की ममता, देखभाल और निस्वार्थ प्रेम को किसी भी तकनीक से पूरी तरह दोहराया नहीं जा सकता।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, AI भावनाओं का अनुकरण कर सकता है, लेकिन वह उन्हें महसूस नहीं कर सकता। माँ का प्यार सिर्फ व्यवहार नहीं, बल्कि एक गहरी भावनात्मक अनुभूति है, जो बच्चे के जीवन में सुरक्षा और अपनापन पैदा करती है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि तकनीक जीवन को आसान और सुविधाजनक जरूर बना रही है, लेकिन इंसानी रिश्तों की जगह नहीं ले सकती। AI भले ही “मां जैसा व्यवहार” दिखा सके, लेकिन झुर्रियों भरे हाथों की गर्माहट और त्याग का सुकून आज भी केवल इंसान ही दे सकता है।
