विशेषज्ञों के अनुसार, क्रेडिट कार्ड से एटीएम के जरिए नकद निकालना सबसे महंगा वित्तीय निर्णयों में से एक हो सकता है। जहां कार्ड से सामान्य खरीदारी पर 45 से 50 दिनों का ब्याज-मुक्त समय मिलता है, वहीं कैश विड्रॉल पर यह सुविधा लागू नहीं होती। जैसे ही ग्राहक एटीएम से पैसे निकालता है, उसी दिन से ब्याज लगना शुरू हो जाता है, जो सालाना 36% से 48% तक पहुंच सकता है।
इसके अलावा, हर बार नकद निकासी पर कैश एडवांस फीस भी देनी होती है, जो आमतौर पर निकाली गई राशि का 2.5% से 3% तक होती है। कई बैंकों में यह न्यूनतम 300 से 500 रुपये तक भी हो सकती है। ऐसे में छोटी रकम निकालना भी महंगा साबित हो जाता है।
हाल ही में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, लोग आपात स्थिति में क्रेडिट कार्ड से कैश निकालने की प्रवृत्ति दिखा रहे हैं, लेकिन यह आदत लंबे समय में आर्थिक दबाव बढ़ा सकती है। फरवरी 2026 में भी करोड़ों रुपये की नकद निकासी दर्ज की गई, जो इस सुविधा के बढ़ते उपयोग को दर्शाती है।
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि क्रेडिट कार्ड से कैश निकालना बैंक की नजर में वित्तीय संकट का संकेत माना जाता है। इससे व्यक्ति का क्रेडिट व्यवहार नकारात्मक रूप से प्रभावित होता है और आगे चलकर CIBIL Score गिर सकता है, जिससे होम लोन, कार लोन या अन्य ऋण लेना कठिन हो सकता है।
इसका सीधा असर व्यक्ति की आर्थिक विश्वसनीयता पर पड़ता है। जब बैंक यह देखते हैं कि कोई ग्राहक बार-बार क्रेडिट कार्ड से नकद निकाल रहा है, तो वे उसे उच्च जोखिम वाला उधारकर्ता मान सकते हैं।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आपात स्थिति में क्रेडिट कार्ड कैश विड्रॉल की बजाय अन्य विकल्पों पर ध्यान देना चाहिए। जैसे कि Emergency Fund का उपयोग, जो 3 से 6 महीने के खर्च के बराबर होना चाहिए। इसके अलावा Personal Loan भी एक बेहतर विकल्प माना जाता है क्योंकि इसकी ब्याज दर अपेक्षाकृत कम होती है। छोटे खर्चों के लिए “बाय नाउ पे लेटर” जैसी सुविधाएं भी उपयोगी हो सकती हैं, लेकिन इनका भी जिम्मेदारी से उपयोग जरूरी है।
कुल मिलाकर, क्रेडिट कार्ड से कैश निकालना सुविधा जरूर देता है, लेकिन इसके पीछे छिपी लागत और जोखिम इसे एक महंगा सौदा बना देते हैं। समझदारी इसी में है कि इस विकल्प का उपयोग केवल अत्यंत आपात स्थिति में ही किया जाए, ताकि वित्तीय स्थिरता बनी रहे और बजट पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
