तिथि और अमावस्या का समय
ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई 2026 को सुबह 5:11 बजे शुरू होकर 17 मई 2026 को सुबह 1:30 बजे तक रहेगी। इसी कारण व्रत और पूजा 16 मई को ही करना शुभ माना गया है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
सुबह 6:00 बजे से 10:30 बजे तक का समय पूजा के लिए अत्यंत शुभ रहेगा।
सूर्योदय लगभग सुबह 5:30 बजे के आसपास माना गया है, इसलिए महिलाएं प्रातःकाल स्नान करके व्रत की शुरुआत करती हैं।
व्रत के दिन सुहागिन महिलाएं बरगद (वट) वृक्ष की पूजा करती हैं।
वट वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत लपेटा जाता है
7 परिक्रमा की जाती हैं, जो सात जन्मों के दांपत्य सुख का प्रतीक मानी जाती हैं
कुछ स्थानों पर 11 या 108 परिक्रमा भी की जाती हैं
सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी जाती है
पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना की जाती है
पौराणिक मान्यता के अनुसार देवी सावित्री ने अपने तप और संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। इसी कारण यह व्रत स्त्रियों के लिए अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर पूरे श्रद्धा भाव से वट वृक्ष की पूजा करती हैं और वैवाहिक सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
