हे मातु नर्मदे हम है तेरे तट के वासी
करूणा कर दे ऐसी, बने सभी सुखरासी।
न कोई दुखी न पीड़ा हो, ऐसी करूणा करो
न कोई भ्रमित न वेदना हो, माँ संताप हरो।। हे मातृ.. . .
तेरे अमृतमय जल की, सब पर हो अमृतमयी कृपा
न भ्रान्तिया हो बाकी, सबकी कामना तू मिटा।
अमृतमयी पावन जल की, माँ तू ही है स्वामिनी
प्राणीमात्र को आनंदित करती, हे धरागामिनी। हे मातृ . . . .
तेरी परिक्रमा से सबके,,मन की होती है एक ही दशा
समयबोध का अवसर छूटे, छाये सबपर भक्ति का नशा।
एक ही साचें में ढले सभी, मा ऐसी कृपा करो
न अभाव हो न चिंता हो, संताप सभी के हरो।हे मातृ नर्मदे . . . .
स्वार्थी रहे न कोई यहा, निस्वार्थी हो सभी परिवार
ऊॅच-नीच न हो कोई, न स्वामी सेवक की दीवार
हे मातृ नर्मदे करदे, नर्मदापुरम को ऐसा आलोक
ज्वलंनशील ताप सभी हर,,न रहे किसी को शोक…हे मातृ नर्मदे . . . .
कामना पीव की पूरी कर मा, नर्मदापुरम की जय होवे
सबके घर में, सबके मन में, चिरस्थायी विजय होवे ।
तेरी कृपा के चातक है , माँ हम नर्मदापुरम वासी
तेरे कण कण में बसे हुये है,शिवशंकर भोले अविनासी।।
हे मातृ नर्मदे हम है तेरे तट के वासी़.
करूणा कर दे ऐसी बने सभी सुखराशि।।।
आत्माराम यादव पीव चीफ एडिटर हिन्द संतरी
नर्मदापुरम
