सबसे बड़ी गलती खराब क्वालिटी वाले चार्जर का इस्तेमाल करना मानी जाती है। कई कंपनियां अब फोन के साथ चार्जर नहीं देतीं, ऐसे में लोग सस्ते या लोकल चार्जर खरीद लेते हैं। ऐसे चार्जर सही तरीके से वोल्टेज कंट्रोल नहीं कर पाते, जिससे बैटरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और उसकी क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। इसलिए हमेशा ओरिजिनल या सर्टिफाइड चार्जर का ही इस्तेमाल करना चाहिए।
फोन को जरूरत से ज्यादा गर्म होने देना भी बैटरी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। धूप में फोन इस्तेमाल करना, गेमिंग के दौरान चार्जिंग करना या लंबे समय तक लगातार भारी ऐप्स चलाना बैटरी को ओवरहीट कर सकता है। अधिक तापमान के कारण बैटरी के अंदर केमिकल रिएक्शन तेज हो जाते हैं, जिससे बैटरी जल्दी डैमेज होने लगती है।
कई यूजर्स की आदत होती है कि वे फोन को पूरी तरह डिस्चार्ज होने के बाद ही चार्ज करते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बार-बार बैटरी को 0 प्रतिशत तक गिराना उसकी लाइफ कम कर सकता है। बेहतर होगा कि फोन को 20 से 30 प्रतिशत बैटरी बचने पर ही चार्ज कर लिया जाए।
बहुत ज्यादा ठंड में फोन चार्ज करना भी नुकसानदेह हो सकता है। अत्यधिक ठंडे तापमान में बैटरी की क्षमता प्रभावित होती है और चार्जिंग प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है। लंबे समय तक ऐसा होने पर बैटरी के अंदर तकनीकी दिक्कतें बढ़ने लगती हैं।
इसके अलावा स्मार्ट चार्जिंग फीचर को नजरअंदाज करना भी गलत माना जाता है। आजकल कई स्मार्टफोन्स में बैटरी प्रोटेक्शन या स्मार्ट चार्जिंग फीचर दिया जाता है, जो बैटरी को लंबे समय तक 100 प्रतिशत चार्ज रहने से बचाता है। इससे बैटरी की हेल्थ लंबे समय तक बेहतर बनी रहती है।
टेक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यूजर्स इन छोटी लेकिन जरूरी बातों का ध्यान रखें तो स्मार्टफोन की बैटरी कई साल तक बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।
