इस नई तकनीक की सबसे खास बात यह है कि यह चूल्हा इथेनॉल और पानी के मिश्रण से चलता है। दावा किया गया है कि इससे निकलने वाली फ्लेम गैस चूल्हे की तरह साफ और स्थिर होती है, जबकि धुआं बेहद कम निकलता है।
इथेनॉल एक अल्कोहल आधारित ईंधन है, जिसे गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। सरकार का कहना है कि यह तकनीक पूरी तरह भारतीय है और इसे घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है।
जानकारी के मुताबिक इस स्टोव में करीब 7 प्रतिशत पानी मिलाकर इथेनॉल का मिश्रण तैयार किया जाता है। यह मिश्रण स्टोव के फ्यूल टैंक में डाला जाता है और स्टार्ट होते ही यह साफ लौ पैदा कर खाना पकाने में इस्तेमाल होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है, तो भविष्य में एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है। इससे घरेलू रसोई के खर्च में कमी आने के साथ-साथ पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी ने कहा कि यह तकनीक न केवल खाना पकाने का खर्च कम करेगी बल्कि विदेशी गैस आयात पर निर्भरता भी घटाएगी। उन्होंने कहा कि इथेनॉल की मांग बढ़ने से किसानों को भी सीधा लाभ मिलेगा क्योंकि यह ईंधन कृषि आधारित उत्पादों से तैयार होता है।
इथेनॉल स्टोव को लेकर सरकार का दावा है कि यह लकड़ी, कोयला और मिट्टी के तेल जैसे पारंपरिक ईंधनों की तुलना में ज्यादा स्वच्छ विकल्प है। इससे घर के अंदर होने वाला धुआं और प्रदूषण भी कम होगा।
फिलहाल यह तकनीक परीक्षण और मंजूरी के चरण में है। अभी इसकी कीमत और बाजार में लॉन्चिंग की तारीख को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि सुरक्षा परीक्षण पूरे होने के बाद इसे आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह मॉडल सफल रहा तो आने वाले वर्षों में यह घरेलू और व्यावसायिक रसोई दोनों के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
