“फ्यूचर ऑफ इंडिया’स सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री” नाम से जारी इस रोडमैप में 2035 तक देश में 120 से 150 अरब डॉलर का मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें डिजाइन, एडवांस पैकेजिंग, कंपाउंड सेमीकंडक्टर और अन्य उभरती तकनीकों में भारत की संभावनाओं को विस्तार से रेखांकित किया गया है।
इस रोडमैप को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव की मौजूदगी में लॉन्च किया गया। नीति आयोग ने इसे भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और दीर्घकालिक रणनीतिक क्षमता निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है। आयोग के अनुसार फ्रंटियर टेक्नोलॉजी में वैश्विक नेतृत्व केवल अल्पकालिक निवेश से हासिल नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए निरंतर क्षमता निर्माण, दूरदर्शी नीति और समय रहते रणनीतिक निवेश जरूरी होता है।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि भारत ने अपेक्षा से अधिक तेजी से सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में प्रगति की है, लेकिन विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए तकनीकी संप्रभुता अत्यंत आवश्यक होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि ‘ब्लैक बॉक्स टेक्नोलॉजी’ पर अत्यधिक आयात निर्भरता भविष्य में भारत के लिए रणनीतिक जोखिम बन सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में सेमीकंडक्टर केवल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का हिस्सा नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार, ऊर्जा, डिजिटल सेवाओं और आधुनिक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों की बुनियादी जरूरत बन चुके हैं। ऐसे में वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत उपस्थिति किसी भी देश की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति को सीधे प्रभावित करती है।
रोडमैप में यह भी स्वीकार किया गया है कि भारत एक साथ पूरी वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता। इसलिए उन क्षेत्रों पर फोकस करने की रणनीति बनाई गई है जहां भारत तेजी से वैश्विक बढ़त हासिल कर सकता है। डिजाइन, एडवांस पैकेजिंग और कंपाउंड सेमीकंडक्टर को ऐसे ही प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया है।
भारत पहले ही सेमीकंडक्टर मिशन, शुरुआती निवेश और अमेरिका, जापान तथा यूरोपीय देशों के साथ बढ़ती तकनीकी साझेदारी के जरिए मजबूत आधार तैयार कर चुका है। अब आने वाला दशक इस गति को स्थायी औद्योगिक और तकनीकी क्षमता में बदलने के लिए निर्णायक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह रोडमैप प्रभावी तरीके से लागू होता है तो भारत न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होगा बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में भी बड़ी भूमिका निभा सकेगा। इससे रोजगार, निवेश, तकनीकी अनुसंधान और विनिर्माण क्षेत्र को व्यापक गति मिलने की उम्मीद है।
