मुनि श्री ने कहा कि मन की स्थिरता ही आत्मा को परमात्मा और भगवत्ता से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करती है। जब व्यक्ति अपने मन पर नियंत्रण स्थापित कर लेता है, तब वह जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी संतुलित और शांत रह सकता है।
विधान के प्रवक्ता Anshul Jain ने बताया कि इस धार्मिक अनुष्ठान के पुण्यार्जक परिवारों में श्रीमती पांचूबाई, सुहागमल जैन तथा ऋषभ-मंजू जैन परिवार शामिल रहे। उनके द्वारा विधान मंडल पर प्रमुख धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराई गईं।
कार्यक्रम में विभिन्न धार्मिक पात्रों की भूमिकाओं का भी निर्वहन किया गया। सो धर्म इंद्र, प्रियंका, महेंद्र, कुबेर, आशा और विजेंद्र प्रमुख पात्रों के रूप में उपस्थित रहे। वहीं ध्वजारोहण का दायित्व विनोद और विपिन (एमपीटी) ने निभाया।
शांति धारा का पुण्य लाभ मनोज-प्रीति बांगा ने प्राप्त किया। इसके अलावा महाज्ञानायक की भूमिका प्रतिभा-सचिन ने निभाई, जबकि यज्ञनायक के रूप में पूर्ति-शशांक ने अर्घ्य समर्पित कर धार्मिक अनुष्ठान को पूर्णता प्रदान की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्म लाभ अर्जित किया।
