पोषण विशेषज्ञों के अनुसार 100 ग्राम पके हुए चिकन ब्रेस्ट में लगभग 30 से 31 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। यही कारण है कि चिकन को उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन का सबसे लोकप्रिय स्रोत माना जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसमें प्रोटीन अधिक और फैट अपेक्षाकृत कम होता है। यही वजह है कि जिम जाने वाले लोग, खिलाड़ी और फिटनेस प्रेमी अपनी डाइट में चिकन को प्राथमिकता देते हैं।
मछली भी प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत मानी जाती है। सामान्य तौर पर 100 ग्राम मछली में 20 से 26 ग्राम तक प्रोटीन पाया जाता है, हालांकि यह मात्रा मछली की प्रजाति के अनुसार बदल सकती है। मछली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह पोषक तत्व हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ाने और शरीर में सूजन को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसी कारण पोषण विशेषज्ञ नियमित रूप से मछली का सेवन करने की सलाह देते हैं।
मटन भी प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों में शामिल है। 100 ग्राम मटन में लगभग 25 से 27 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है। इसके साथ ही यह आयरन, जिंक और विटामिन बी12 जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों का भी अच्छा स्रोत है। हालांकि मटन में फैट की मात्रा चिकन और अधिकांश मछलियों की तुलना में अधिक होती है। इसलिए इसका सेवन संतुलित मात्रा में करना अधिक उपयुक्त माना जाता है।
यदि केवल प्रोटीन की मात्रा के आधार पर तुलना की जाए तो चिकन सबसे आगे माना जाता है। इसके बाद मटन और फिर मछली का स्थान आता है। लेकिन स्वास्थ्य लाभों के व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाए तो मछली को सबसे संतुलित विकल्प माना जाता है, क्योंकि इसमें प्रोटीन के साथ-साथ हृदय और मस्तिष्क के लिए लाभकारी ओमेगा-3 फैटी एसिड भी मौजूद होता है।
खिलाड़ियों, बॉडीबिल्डर्स और नियमित व्यायाम करने वाले लोगों के लिए चिकन और मछली दोनों ही उत्कृष्ट विकल्प हो सकते हैं। बीमारी से उबर रहे लोगों के लिए भी प्रोटीन युक्त आहार शरीर की रिकवरी में मददगार साबित होता है। वहीं आयरन और विटामिन बी12 की कमी से जूझ रहे लोगों को सीमित मात्रा में मटन का सेवन लाभ पहुंचा सकता है।
बुजुर्गों के लिए भी पर्याप्त प्रोटीन का सेवन आवश्यक माना जाता है, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों की शक्ति कम होने लगती है। ऐसे में मछली और चिकन जैसे आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थ बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी खाद्य पदार्थ का चुनाव केवल प्रोटीन की मात्रा के आधार पर नहीं, बल्कि संपूर्ण पोषण प्रोफाइल और व्यक्तिगत स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
