हाल के दिनों में पति और ससुर की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिसों के बाद सेलिना जेटली ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा कि वर्षों तक उनके परिवार से जुड़ी खबरें, इंटरव्यू और सार्वजनिक प्रस्तुतियां चर्चा का विषय बनी रहीं, लेकिन जब उन्होंने अपने निजी संघर्षों और एक मां के रूप में अपनी चिंताओं को सामने रखा तो उन्हें कानूनी नोटिसों का सामना करना पड़ा। अभिनेत्री का कहना है कि उन्होंने अपने कानूनी प्रतिनिधियों के माध्यम से इन नोटिसों का जवाब भी दे दिया है।
सेलिना जेटली ने अपने बयान में बच्चों की कस्टडी को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि वह हमेशा संयुक्त अभिरक्षा और आपसी सहमति से समाधान के पक्ष में रही हैं। उनके अनुसार उन्होंने कई बार शांतिपूर्ण तरीके से मामले को सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन परिस्थितियां अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहीं। उन्होंने दावा किया कि अदालत के आदेशों के बावजूद बच्चों से संपर्क स्थापित करने में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
अभिनेत्री ने यह भी कहा कि एक मां के रूप में बच्चों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर उनकी जिम्मेदारी सर्वोपरि है। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि बच्चों को उनकी जानकारी या सहमति के बिना विभिन्न न्यायिक क्षेत्रों से बाहर ले जाने की कोशिश की जा सकती है। इसी वजह से उन्होंने अपनी चिंताओं को सार्वजनिक रूप से सामने रखने को आवश्यक बताया।
दूसरी ओर, पति और उनके परिवार की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिसों में आरोप लगाया गया है कि सार्वजनिक मंचों पर लगाए गए कुछ आरोप उनकी प्रतिष्ठा को प्रभावित कर रहे हैं और इसका असर बच्चों पर भी पड़ सकता है। हालांकि सेलिना का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य उन्हें डराना, दबाव बनाना और सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने से रोकना है।
फिल्मी दुनिया में लंबे समय तक सक्रिय रहीं सेलिना जेटली सामाजिक मुद्दों और पारिवारिक विषयों पर भी अपनी राय रखती रही हैं। मौजूदा विवाद के बीच उनका यह बयान सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर अंतिम निर्णय अदालत की प्रक्रिया के तहत ही होगा, लेकिन फिलहाल दोनों पक्षों के दावों और प्रतिक्रियाओं ने इस पारिवारिक विवाद को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
अभिनेत्री ने अपने संदेश में दोहराया कि वह अपने बच्चों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कानूनी और संवैधानिक रास्ता अपनाएंगी। उनके अनुसार यह केवल व्यक्तिगत संघर्ष नहीं बल्कि एक मां के अधिकारों और जिम्मेदारियों से जुड़ा मुद्दा है, जिसके लिए वह अंत तक अपनी आवाज उठाती रहेंगी।
