कार्यालय डेस्क
नर्मदापुरम 17 जून 2026 (हिन्द संतरी) काली मंदिर के सामने ग्वालटोली स्कूल परिसर को पाँच वार्ड छूते है जिसमें ग्वालों की संख्या 80 प्रतिशत है ओर वार्ड 30 एवं 31 के पार्षद भी ग्वाले है फिर क्या कारण है की इन पार्षदों की सीमा में बने ग्वालटोली स्कूल तिराहे पर खुलेआज सट्टा का स्टाल बाजार के एक सट्टा व्यापारी द्वारा खोल दिया गया ओर सब खामोशी से इस सट्टा जुए के कारोबार को चुपचाप देख रहे है। आने वाली पीढ़ी के साथ समाज इतना फूहड़ मजाक क्यो होने दे रहा है जो नैतिकता की कसौटी पर खरा नही उतार पा रहा है, आखिर यह सट्टा कराओबर धड़ल्ले से कैसे चलने दिया जा रहा है क्या यहा के लोगों ने अपने ऊपर नामर्दानगी को अपना लिया है नही तो क्या कारण है यह सट्टा पिछले एक महीने से सबकी छाती पर नासूर बना समाज को अपराधों की ओर धकेल रहा है।

यहाँ समाज में कई स्तरों पर टूटन बढ़ी है पर जबावदेह खामोश है ओर चुपचाप अपने ओर समाज के साथ अन्याय को सह रहा है। सट्टा –जुआ का अवैध कारोबार करने वाले लोग जानते है की किसी एक को यहा अपना माईबाप बना कर उसकी राजनीतिक पकड़ से सब कुछ संभव है, पुलिस तो खामोशी से अपने हिस्सेदारी के बाद खबर मिलने पर कार्यवाही के नाम पर सटोरियों को शिकायत करने वालों से आगाह कराकर चली जाती है, परिणाम स्वरूप शहर के सभी मोहल्लों के तरह अब ग्वालों के एकछत्र एकता को खंडित कर ये सब चल रहा है।

आज संयुक्त परिवार बिखर चुके हैं, एकल परिवार भी टूट चुके हैं- भावनात्मक रूप से नहीं तो कम से कम भौतिक रूप से। मां-बाप पुराने घरों में बच्चों के इंतजार में हैं और बच्चे अपनी नई काम-धाम ओर सोशलमीडिया में डूबे अपनी आजादी को खुद गंवा चुके है जो शिक्षा इन बच्चों को जीवन के सरोकारों, संघर्षों या सवालों से जोड़ सकती थी, वह अब नहीं बची है। जिसका इतना बुरा हश्र हो गया की जिस राजनीति का दायित्व सांस्कृतिक माहौल बनाना है, वह सांप्रदायिकता, जातिवाद और भ्रष्टाचार के गर्त में डूबी है। उसके लिए अब अवैध शराब, सट्टा जुआँ आदि उन्हे ऊपर की कमाई का अवसर दे रहे है । पुलिसवाले जब खुद इनके सट्टे के स्टालों में आने लगे तब नैतिकता ओर ईमानदारी का पाठ यह पीढ़ी सीखने की बाजाय खुद इस कारोबार में खुदकों धकेलने को अपना लक्ष नहीं बनाएगी, यह विचारणीय है …क्या पुलिस अधीक्षक ओर नवोदित थाना प्रभारी इस ओर ध्यान देंगे?
