टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने निर्धारित 20 ओवर में चार विकेट के नुकसान पर 170 रन बनाए। भारत को स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा ने शानदार शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 66 रन जोड़कर टीम को मजबूत आधार दिया। शेफाली वर्मा ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 26 गेंदों पर 34 रन बनाए जिसमें दो छक्के और तीन चौके शामिल रहे। उनके आउट होने के बाद स्मृति मंधाना ने पारी को आगे बढ़ाया और 37 गेंदों पर 38 रन की उपयोगी पारी खेली।
भारत ने 83 रन तक दोनों सलामी बल्लेबाजों के विकेट गंवा दिए थे लेकिन इसके बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर ने जिम्मेदारी संभाल ली। उन्होंने जेमिमा रोड्रिगेज के साथ तीसरे विकेट के लिए 64 रन की अहम साझेदारी कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। जेमिमा ने 34 रन बनाकर रिटायर्ड आउट होने से पहले महत्वपूर्ण योगदान दिया जबकि हरमनप्रीत कौर ने विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए केवल 27 गेंदों पर 56 रन बनाए। उनकी पारी में छह चौके और तीन शानदार छक्के शामिल रहे। उन्होंने केवल 25 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ महिला टी20 क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक लगाने वाली तीसरी बल्लेबाज बनने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। ऑस्ट्रेलिया की ओर से कप्तान सोफी मोलिनेक्स ने दो विकेट हासिल किए।
171 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसने केवल चार रन के स्कोर पर पहला विकेट गंवा दिया। हालांकि इसके बाद फीबी लिचफील्ड और बेथ मूनी ने पारी को संभालते हुए दूसरे विकेट के लिए 50 रन की साझेदारी की। लिचफील्ड ने 24 रन बनाए जबकि बेथ मूनी ने 22 रन का योगदान दिया।
भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआती सफलता जरूर हासिल की लेकिन इसके बाद एलिस पेरी और एश्ले गार्डनर की शानदार बल्लेबाजी के सामने टीम बेबस नजर आई। दोनों खिलाड़ियों ने चौथे विकेट के लिए 100 रन की मैच जिताऊ साझेदारी कर मुकाबला पूरी तरह ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में कर दिया। एलिस पेरी ने 38 गेंदों पर 56 रन की बेहतरीन पारी खेली जबकि एश्ले गार्डनर ने 29 गेंदों पर नाबाद 53 रन बनाकर टीम को 19वें ओवर में जीत दिला दी।
भारत की ओर से श्री चरणी ने दो विकेट हासिल किए जबकि दीप्ति शर्मा और रेणुका ठाकुर को एक एक सफलता मिली। हालांकि गेंदबाज ऑस्ट्रेलिया के मजबूत बल्लेबाजी क्रम पर दबाव बनाने में सफल नहीं हो सके। भारतीय टीम ने बल्लेबाजी में अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन निर्णायक मुकाबले में गेंदबाजी अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर सकी और इसी के साथ टीम का विश्व कप अभियान समाप्त हो गया।
