नीलेश यादव जिला ब्यूरो
नर्मदापुरम 01 जुलाई 2026 (हिन्द संतरी ) ३० जून को प्रदेश के लोक निर्माण विभाग मंत्री एवं नर्मदापुरम जिले के प्रभारी मंत्री राकेश सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर जनपद पंचायत परिसर में बादाम के पौधे का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए हुए वर्षा के जल का संचयन करने की अपील का आने वाली पीढ़ी के लिए जल संचयन करने का सन्देश दिया.
इस अवसर पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं नर्मदापुरम विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा, राज्यसभा सांसद श्रीमती माया नारोलिया, सिवनी मालवा विधायक श्री प्रेमशंकर वर्मा, सोहागपुर विधायक श्री विजयपाल सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती राधा पटेल, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती नीतू यादव, जनपद पंचायत नर्मदापुरम अध्यक्ष श्री भूपेंद्र चौकसे, श्रीमती प्रीति शुक्ला, सुश्री राजो मालवीय, श्री पीयूष शर्मा, श्री माधव अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा, पुलिस अधीक्षक श्री सई कृष्ण एस. थोटा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हिमांशु जैन, वनमंडलाधिकारी श्री गौरव शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रभारी मंत्री श्री राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में प्रदेशभर में गत 100 दिनों से संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान का औपचारिक समापन 30 जून को हो रहा है, लेकिन यह अभियान किसी निश्चित अवधि तक सीमित नहीं है। यह जल संरक्षण एवं जल संवर्धन के लिए समाज की सामूहिक और सतत जिम्मेदारी का अभियान है।
उन्होंने कहा कि लगातार तीसरे वर्ष इस अभियान के तीन चरण सफलतापूर्वक पूरे किए गए हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान केवल एक शासकीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने का जन आंदोलन है। उन्होंने कहा कि मां नर्मदा के तट पर जन्म लेना हम सभी का सौभाग्य है, लेकिन देश के अनेक क्षेत्रों में जल की प्रत्येक बूंद अत्यंत मूल्यवान है। इसलिए जल संरक्षण को केवल शासन-प्रशासन का दायित्व न मानते हुए प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
प्रभारी मंत्री ने कहा कि हमारी परंपरा में जल, वृक्ष और प्रकृति को देवतुल्य एवं मातृ स्वरूप माना गया है। पूर्वजों द्वारा तालाबों, कुओं और जल स्रोतों के संरक्षण की परंपरा आज भी प्रेरणादायक है। हमें उसी भावना के साथ जल संचयन और जल संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाना होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों के साथ जब जनभागीदारी जुड़ती है, तब कोई भी अभियान जन आंदोलन का स्वरूप ले लेता है। जिस प्रकार हमें अपने पूर्वजों से समृद्ध धरोहर मिली है, उसी प्रकार हमारी जिम्मेदारी है कि हम आने वाली पीढ़ियों को जल संपदा से समृद्ध विरासत सौंपें। उन्होंने सभी नागरिकों से वर्षा जल संचयन, वाटर हार्वेस्टिंग तथा परंपरागत जल संरक्षण के उपाय अपनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। श्रीसिंह ने जल संरक्षण के क्षेत्र में अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में जल मंदिरों की स्थापना, जल रैलियों तथा जनजागरण के अनेक कार्यक्रम आयोजित किए थे, जिनकी सराहना देश के प्रधानमंत्री द्वारा भी की गई थी। उन्होंने कहा कि समाज जब किसी लक्ष्य के प्रति जागरूक होता है, तब कोई भी चुनौती बड़ी नहीं रहती। समापन अवसर पर मंत्री श्री सिंह ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का जनता के नाम संदेश का वाचन कर नागरिकों को सुनाया। उन्होंने उपस्थित सभी नागरिकों से अपील की की वर्षा काल में वर्षा जल संचित करने के प्रयास अवश्य किए जाएं। जल संचयन के लिए वाटर हार्वेस्टिंग तथा अन्य परंपरागत माध्यमों से वर्षा जल को धरती में समाहित किए जाने के प्रयास किए जाएं।
कार्यक्रम के दौरान नर्मदापुरम विधायक डॉ सीतासरन शर्मा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि वृक्षारोपण के माध्यम से एवं वाटर हार्वेस्टिंग का उपयोग कर जल संरक्षण को प्रभावी रूप से जमीनी स्तर पर उतार सकते है जिससे आने वाली पीढी को पर्याप्त मात्रा में पानी मिले।
अभियान अवधि के अंतर्गत की गई विभिन्न गतिविधियां, 12 विभागों ने निभाई अपनी सहभागिता
जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण एवं संवर्धन हेतु उल्लेखनीय कार्य संपादित किये गये है।शासन के निर्देश अनुसार जिले में अभियान से जुडे सभी 12 विभागों द्वारा उनकी योजनाओं का क्रियान्वयन इस अवधि में किया गया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा अभियान के दौरान जिले में विगत अभियान में लिये गये जल संवर्धन संरक्षण , पौधरोपण कार्यो को पूर्ण किया गया है। अभियान के दौरान खेत तालाब, कूप रिचार्ज, वाटर कंजरवेशन जल संवर्धन संरक्षण कार्य, पौध रोपण कार्य पूर्ण किये गये है। अभियान में मॉ नर्मदा एवं जिले में उनकी सभी सहायक नदियों के घाटों की सफाई भी जन सहभागिता से सुनिश्चित की गई है। इस अवधि में 5 नवीन अमृत सरोवर का निर्माण भी जनपद पंचायत केसला अंतर्गत करवाया गया है। अन्य विभागों द्वारा की गई गतिविधियों में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शालाओं में पानी की टंकियों की साफ-सफाई कराई गई है। उद्यानिकी विभाग द्वारा हितग्राहियों को फलदार पौधरोपण का लाभ दिया गया है। जल संवर्धन चौपाल आयोजित की गई साथ ही सूक्ष्म सिंचाई क्षेत्र विस्तार का कार्य भी किया गया है। नगरीय निकायों द्वारा जल संरक्षण संरचनाओं से जलगृहण संरचनाओं को अतिक्रमण मुक्त कराया गया एवं रेन वाटर हार्वेस्टिंग शहरी क्षेत्रों में करवाये गये। सार्वजनिक स्थलों पर प्याउ स्थापित किये गये। जल नमूनों की गुणवत्ता का परीक्षण किया गया। माय भारत पोर्टल पर अमृत मित्र दर्ज कराये गये । वन विभाग द्वारा चेक डेम निर्माण, तालाब निर्माण एवं कंटूर ट्रेंच निर्माण कार्य कराये गये। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जल जागरूकता शिविर आयोजित किये गये । राज्स्व विभाग द्वारा पूर्व वर्षो में निर्मित अमृत सरोवरों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबॉडियों में पोषण वाटिका, रेन वाटर हार्वेस्टिंग कार्य किये गये। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा स्कूल एवं आंगनबाडियों में पानी की गुणवत्ता जांच की गई एवं पंप ऑपरेटरों ट्रेनिंग दी गई। जन अभ्यिान परिषद् द्वारा जल के प्रति जन चेतना हेतु जल यात्रायें , वृक्षपूजन, नदी तटों की सफाई, जल चौपाल , जल संवाद आदि कार्यक्रम आयोजित किये गये है। उद्योग विभाग द्वारा औद्योगिक इकाइयों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग एवं वृक्षारोपण कार्य कराया गया है
