मुकाबले की शुरुआत से ही फ्रांस ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और लगातार आक्रमण किए लेकिन पैराग्वे की अनुशासित रक्षापंक्ति ने पहले हाफ में उसे कोई स्पष्ट मौका नहीं दिया। फ्रांस के अधिकांश प्रयास दूर से लगाए गए शॉट तक सीमित रहे जिन्हें पैराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने शानदार ढंग से रोक दिया। मजबूत डिफेंस के दम पर पैराग्वे ने पहले हाफ में फ्रांस को गोल करने से रोके रखा।
दूसरे हाफ में फ्रांस ने अपनी गति और आक्रामकता बढ़ा दी। ओस्मान डेम्बेले ने कॉर्नर से बने मौके पर गोल करने की कोशिश की लेकिन गेंद साइड नेटिंग में चली गई। इसके बाद मनु कोने के लंबी दूरी के शक्तिशाली शॉट को भी ऑरलैंडो गिल ने बेहतरीन डाइव लगाकर बचा लिया।
लगातार बढ़ते दबाव के बीच 69वें मिनट में फ्रांस को निर्णायक मौका मिला। डिजायर डूए को पेनल्टी बॉक्स के भीतर फाउल किए जाने पर रेफरी ने पेनल्टी दे दी। किलियन एम्बाप्पे ने बिना किसी गलती के गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचाकर फ्रांस को 1-0 की बढ़त दिला दी। इसके बाद फ्रांस ने संयमित खेल दिखाते हुए यह बढ़त अंत तक कायम रखी और क्वार्टर फाइनल का टिकट हासिल कर लिया।
एम्बाप्पे के लिए यह मुकाबला कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। उन्होंने इस विश्व कप में अपना सातवां गोल दागा और गोल्डन बूट की दौड़ में अपनी दावेदारी और मजबूत कर ली। इसके अलावा विश्व कप के नॉकआउट मुकाबलों में यह उनका 11वां गोल रहा। वह लगातार तीन अलग-अलग विश्व कप के राउंड ऑफ 16 मुकाबलों में गोल करने वाले पहले खिलाड़ी भी बन गए।
मैच के बाद एम्बाप्पे ने कहा कि टीम को पहले से अंदाजा था कि पैराग्वे के खिलाफ मुकाबला आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस मैच ने साबित किया कि फ्रांस केवल आक्रामक फुटबॉल खेलने वाली टीम नहीं बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी जीत हासिल करना जानती है। उन्होंने कहा कि अब पूरी टीम का ध्यान क्वार्टर फाइनल में मोरक्को के खिलाफ होने वाले मुकाबले पर है क्योंकि मोरक्को एक बेहद मजबूत और संतुलित टीम है।
अब फुटबॉल प्रेमियों की नजरें क्वार्टर फाइनल पर होंगी जहां फ्रांस और मोरक्को के बीच रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा। दोनों टीमों ने राउंड ऑफ 16 में प्रभावशाली प्रदर्शन किया है और सेमीफाइनल में जगह बनाने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगी।
