मध्य प्रदेश । घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब कैदियों के पास पूरे हफ्ते के राशन का प्रबंधन करने के लिए पर्याप्त बजट नहीं बचा। इस वित्तीय संकट के कारण घरवालों ने आपसी सहमति से तय किया कि एकजुटता दिखाने के लिए कोई भी सदस्य खाना नहीं खाएगा। सुबह सोकर उठने के बाद जब अन्य प्रतियोगी बाहर बैठे थे, तब सुनीता ने भोजन की अनुपलब्धता पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने निराशा में कहा कि किसी भी व्यक्ति को इतना मजबूर नहीं किया जाना चाहिए कि वह अपनी सीमाओं को लांघने पर विवश हो जाए। इसी बातचीत के दौरान वह बेहद भावुक हो गईं और उन्होंने अपने पति व अभिनेता गोविंदा (चीची) को याद करते हुए कहा कि उनके पति ने उन्हें इस शो में आने से साफ मना किया था। सुनीता ने अफसोस जताते हुए स्वीकार किया कि जब भी उन्होंने अपने पति की बात की अनदेखी की है, उन्हें हमेशा नुकसान और पछतावे का सामना करना पड़ा है।
इसके बाद जब शो के नियमों के मुताबिक भोजन हासिल करने के लिए एक क्विज टास्क आयोजित किया गया, तो सुनीता ने किसी भी सवाल का जवाब देने से पूरी तरह इनकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह अब इस प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं बने रहना चाहतीं और जल्द से जल्द बाहर जाना चाहती हैं। स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों और दवाओं के सेवन के बावजूद उन्होंने सुबह केवल चाय पी और नाश्ता करने से मना कर दिया। सह-प्रतियोगियों द्वारा दवाइयां लेने के आग्रह पर उन्होंने कहा कि यदि वह बीमार पड़ेंगी, तभी मेकर्स उन्हें वापस घर भेजेंगे।
इस संवेदनशील स्थिति को संभालने और साप्ताहिक टास्क को पूरा कराने के लिए जब अभिनेता रितेश सेट पर पहुंचे, तो उन्होंने बजट का सही इस्तेमाल न करने को लेकर सभी प्रतियोगियों को जमकर फटकार लगाई। सुनीता ने रितेश के सामने अपनी बात रखते हुए शिकायत की कि वह मधुमेह (डायबिटीज) से पीड़ित हैं और रात का भोजन न मिलने की वजह से उन्हें घबराहट और मनोवैज्ञानिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। जब रितेश ने उनसे पूछा कि बजट उपलब्ध होने के बाद भी उन्होंने अपने लिए भोजन क्यों नहीं मंगाया, तो सुनीता ने एक सीनियर सदस्य होने के नाते अकेले खाना खाने को अनुचित बताया। सुनीता के इस गंभीर भावनात्मक ब्रेकडाउन को देखते हुए रितेश ने खुद आगे बढ़कर उन्हें गले लगाया और सांत्वना देते हुए इस विषय पर अलग से व्यक्तिगत बातचीत करने का आश्वासन दिया।
