विवाद के दौरान कांग्रेस विधायकों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उनकी बात सांसद से हो रही थी ऐसे में बीच में हस्तक्षेप करने का अधिकार किसे है। दोनों पक्षों के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि कुछ समय तक बैठक का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण बना रहा। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि उनकी बातों को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है और नाराज होकर बैठक से बाहर निकल गए। बैठक की अध्यक्षता कर रहे सांसद आलोक शर्मा ने दोनों नेताओं को रोकने और समझाने का प्रयास किया लेकिन वे वापस नहीं लौटे।
बैठक के बाद सांसद आलोक शर्मा ने भी स्वीकार किया कि भोपाल के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान का जल्द लागू होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से जल्द मुलाकात कर मास्टर प्लान को शीघ्र लागू कराने का आग्रह किया जाएगा। उनका मानना है कि राजधानी के भविष्य के विकास और बुनियादी ढांचे को व्यवस्थित बनाने के लिए मास्टर प्लान सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
बैठक के दौरान केवल मास्टर प्लान ही नहीं बल्कि स्मार्ट सिटी परियोजना भी जनप्रतिनिधियों के निशाने पर रही। भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने परियोजना की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर बड़े निर्माण तो हुए लेकिन नागरिक सुविधाओं की अनदेखी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कई इमारतों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है और दशहरा मैदान जैसी महत्वपूर्ण जगहों का भी नुकसान हुआ है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्मार्ट सिटी के बड़े व्यावसायिक प्लॉट छोटे किए जाएं ताकि उनकी बिक्री आसान हो और परियोजना की आय बढ़ सके।
महापौर मालती राय ने भी स्मार्ट सिटी की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्ट्रीट लाइट जैसी सामान्य समस्याओं का समाधान भी समय पर नहीं हो पाता जिससे आम नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ती है। इस पर कलेक्टर एवं स्मार्ट सिटी बोर्ड के अध्यक्ष प्रियंक मिश्रा ने भरोसा दिलाया कि अलग बैठक कर सभी समस्याओं की समीक्षा की जाएगी और समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।
सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी दिखाई देती है। उन्होंने पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक नोडल एजेंसी बनाने का सुझाव दिया ताकि सभी विभाग मिलकर बेहतर तरीके से काम कर सकें। इस दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भी भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी द्वारा उठाए गए मुद्दों का समर्थन करते हुए कहा कि यदि वरिष्ठ जनप्रतिनिधि समस्याओं की ओर ध्यान दिला रहे हैं तो अधिकारियों को उन्हें गंभीरता से लेकर जल्द समाधान करना चाहिए।
बैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भोजपाल वेटलैंड प्राधिकरण के गठन को लेकर भी पारित किया गया। प्रस्ताव के अनुसार संभागायुक्त को प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया जाए जबकि भोपाल और सीहोर के कलेक्टर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा जनप्रतिनिधियों को इसमें शामिल किया जाए। इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री के पास भेजने का निर्णय लिया गया। साथ ही भोपाल को आधिकारिक रूप से वेटलैंड सिटी घोषित करने की मांग भी बैठक में प्रमुखता से उठाई गई।
