एक बातचीत के दौरान शमिता शेट्टी ने बताया कि शुरुआती दिनों में उन्हें यह समझ नहीं आ रहा था कि जो शारीरिक तकलीफें और बदलाव वह महसूस कर रही हैं, वे सामान्य हैं या किसी गंभीर बीमारी के संकेत हैं। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने पहली बार डॉक्टर से संपर्क किया तो कई जरूरी जांच कराई गईं, लेकिन रिपोर्ट सामान्य आने के कारण बीमारी की वास्तविक वजह सामने नहीं आ सकी। इसके बाद हर बार लक्षण सामने आने पर उन्हें यही लगता रहा कि शायद यह महिलाओं के जीवन का सामान्य हिस्सा है।
शमिता ने कहा कि महिलाओं के साथ अक्सर यह समस्या देखने को मिलती है कि वे अपने दर्द और असुविधा को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द, हार्मोनल बदलाव या अन्य शारीरिक परेशानियों को कई बार इतनी सामान्य चीज समझ लिया जाता है कि गंभीर बीमारियों के शुरुआती संकेत भी अनदेखे रह जाते हैं। उन्होंने माना कि समाज में भी महिलाओं की कई स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर पर्याप्त जागरूकता नहीं है, जिससे समय पर जांच और उपचार नहीं हो पाता।
अभिनेत्री ने बताया कि सर्जरी से कुछ महीने पहले उनकी स्थिति काफी कठिन हो गई थी। दर्द धीरे-धीरे इतना बढ़ गया कि इसका असर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और नींद पर भी पड़ने लगा। उन्होंने कहा कि जब दर्द की वजह से उनकी नींद बार-बार टूटने लगी, तब उन्हें महसूस हुआ कि यह कोई सामान्य समस्या नहीं है। उसी समय उन्होंने अपनी परेशानी की वास्तविक वजह जानने का निर्णय लिया और आगे की जांच कराई।
शमिता शेट्टी ने यह भी बताया कि उसी दौरान वह पेरिमेनोपॉज के चरण से भी गुजर रही थीं। शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलावों के कारण उनके लिए यह समझना और भी मुश्किल हो गया था कि उनकी तकलीफ का कारण एंडोमेट्रियोसिस है या पेरिमेनोपॉज से जुड़े परिवर्तन। लगातार बदलते शारीरिक संकेतों ने स्थिति को और जटिल बना दिया था। उन्होंने स्वीकार किया कि इस दौरान उन्हें काफी भ्रम और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।
उन्होंने महिलाओं को सलाह देते हुए कहा कि शरीर द्वारा दिए जाने वाले संकेतों को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि किसी प्रकार का दर्द, असामान्य लक्षण या स्वास्थ्य समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो उसे सामान्य मानकर सहते रहने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लेना आवश्यक है। समय पर जांच और सही उपचार कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ने से रोक सकता है।
शमिता की इस स्वास्थ्य यात्रा ने एक बार फिर महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस जैसी बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत को रेखांकित किया है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि समय रहते लक्षणों की पहचान और चिकित्सकीय सलाह लेने से बेहतर उपचार संभव हो सकता है। महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर खुलकर चर्चा करना और जागरूकता बढ़ाना आज पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है।
