वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार इस दौरे का मुख्य उद्देश्य यूरोप के साथ भारत की आर्थिक भागीदारी को और मजबूत बनाना है। यात्रा के दौरान एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग क्लीन एनर्जी डिजिटल टेक्नोलॉजी नवाचार रत्न एवं आभूषण उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। इसके साथ ही दोनों पक्ष निवेश के नए अवसरों और दीर्घकालिक व्यापारिक साझेदारी पर भी चर्चा करेंगे।
सरकार का मानना है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित व्यापक व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने में यह दौरा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारत की कोशिश एक ऐसे संतुलित और पारस्परिक लाभ वाले समझौते की है जो मजबूत आपूर्ति श्रृंखला टिकाऊ विकास और नियम आधारित वैश्विक व्यापार व्यवस्था को बढ़ावा दे सके। यही वजह है कि इस दौरे को केवल राजनयिक यात्रा नहीं बल्कि आर्थिक सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
स्पेन दौरे के दौरान पीयूष गोयल वहां के शीर्ष राजनीतिक और आर्थिक नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। वे स्पेन के पहले उपराष्ट्रपति और अर्थव्यवस्था व्यापार एवं उद्योग मंत्री कार्लोस कुएर्पो कैबालेरो उद्योग एवं पर्यटन मंत्री जोर्डी हेरेउ बोहेर तथा विदेश मामलों और यूरोपीय संघ सहयोग मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस बुएनो के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके अलावा भारत स्पेन बिजनेस राउंडटेबल की अध्यक्षता करते हुए वे स्पेन की प्रमुख कंपनियों और उद्योग संगठनों के साथ निवेश और कारोबारी साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। इस दौरान भारत में निवेश के अवसरों को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा।
बेल्जियम में केंद्रीय मंत्री एंटवर्प बंदरगाह और विश्व प्रसिद्ध एंटवर्प वर्ल्ड डायमंड सेंटर का दौरा करेंगे। यहां वे कई प्रमुख वैश्विक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। इसके अलावा ब्रसेल्स में आयोजित तीसरी भारत यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद की मंत्री स्तरीय बैठक की सह अध्यक्षता भी करेंगे। यह परिषद भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार भरोसेमंद तकनीक और आर्थिक सुरक्षा जैसे विषयों पर सहयोग का सबसे महत्वपूर्ण संस्थागत मंच माना जाता है।
फिनलैंड में पीयूष गोयल वहां के आर्थिक मामलों के मंत्री डॉ सकारी पुइस्टो के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। साथ ही भारत फिनलैंड बिजनेस राउंडटेबल में भाग लेकर फिनिश कंपनियों को भारत में निवेश और साझेदारी के नए अवसरों से अवगत कराएंगे। विशेष रूप से डिजिटल तकनीक हरित ऊर्जा और नवाचार आधारित उद्योगों में सहयोग बढ़ाने पर जोर रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव तेजी से हो रहे हैं और दुनिया विश्वसनीय व्यापारिक साझेदारों की तलाश में है। भारत तेजी से विनिर्माण नवाचार और तकनीकी विकास का बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। ऐसे में यूरोपीय देशों के साथ मजबूत आर्थिक संबंध न केवल निवेश बढ़ाएंगे बल्कि रोजगार सृजन तकनीकी सहयोग और निर्यात को भी नई गति देंगे। उम्मीद की जा रही है कि इस दौरे के परिणाम आने वाले समय में भारत और यूरोप के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।
