बारिश की रफ्तार पिछले पांच दिनों से लगभग थमी हुई है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बादल तो छा रहे हैं, लेकिन तेज बारिश नहीं हो रही। यही वजह है कि आधे से अधिक जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, शहडोल, सागर और रीवा संभागों में औसत से 17 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं पश्चिमी क्षेत्र के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में सामान्य से 10 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।
आज ऐसा रहेगा मौसम
मौसम विभाग ने मंगलवार को प्रदेश के कई जिलों में हल्की बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई है। सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में आंधी-गरज के साथ हल्की बारिश हो सकती है।
वहीं भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में तेज धूप निकलने का अनुमान है।
क्यों कमजोर पड़ा मानसून?
मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल मानसून को सक्रिय बनाए रखने वाली प्रमुख मौसम प्रणालियां कमजोर हो गई हैं या उनका प्रभाव मध्य प्रदेश से दूर चला गया है। इसी कारण अधिकांश क्षेत्रों में केवल बादल छाए रहने और हल्की फुहार जैसी स्थिति बनी हुई है। हालांकि, उत्तर बंगाल की खाड़ी में एक नया ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) बनने की संभावना है। यदि यह आगे चलकर निम्न दाब क्षेत्र में परिवर्तित होता है, तो मध्य प्रदेश में एक बार फिर तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है।
इसके अलावा मौसम विभाग का अनुमान है कि प्रशांत महासागर में तीन नए मौसमीय सिस्टम विकसित हो रहे हैं। इनमें से यदि कोई एक भी बंगाल की खाड़ी तक पहुंचता है, तो प्रदेश में मानसून दोबारा सक्रिय होने की संभावना बढ़ जाएगी।
जून की तुलना में जुलाई बेहतर, लेकिन पांच दिन की सुस्ती से घटे आंकड़े
मौसम विभाग के मुताबिक जून में बारिश सामान्य से कम रही थी, जबकि जुलाई की शुरुआत में वर्षा की गतिविधियां बढ़ी थीं। लेकिन पिछले पांच दिनों से तेज बारिश नहीं होने के कारण कुल वर्षा का आंकड़ा घटकर 13 जुलाई को सामान्य से नीचे पहुंच गया।
आंकड़ों के अनुसार, जुलाई मानसून का सबसे महत्वपूर्ण महीना माना जाता है। इसी महीने प्रदेश में पूरे मानसूनी कोटे की लगभग 40 प्रतिशत बारिश होती है। उदाहरण के तौर पर भोपाल में सामान्य वार्षिक वर्षा 39 इंच है, जिसमें से करीब 14 इंच बारिश केवल जुलाई में होती है। वहीं बड़े शहरों में जबलपुर ऐसा शहर है, जहां जुलाई में सबसे अधिक 17 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की जाती है।
