नीलेश यादव जिला ब्यूरो
नर्मदापुरम 19 ,जुलाई,2026(हिन्द संतरी ) राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती तृप्ति शर्मा के मार्गदर्शन एवं सतत निगरानी में 18 जुलाई को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, नर्मदापुरम द्वारा जिला न्यायालय नर्मदापुरम सहित तहसील न्यायालय इटारसी, पिपरिया, सोहागपुर एवं सिवनी मालवा में विशेष लोक अदालत का आयोजन किया गया। विशेष लोक अदालत का शुभारंभ विशेष न्यायाधीश श्री मनोज कुमार ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर प्रथम जिला न्यायाधीश श्री दिनेश कुमार नोटिया, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री फिरोज अख्तर, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्रीमती दिव्या मित्तल, जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री अभय सिंह, अधिवक्तागण, बैंक अधिकारियों, न्यायालयीन कर्मचारियों एवं पक्षकारों की उपस्थिति रही।

विशेष लोक अदालत में प्रस्तुत प्रकरणों के निराकरण के लिए 9 न्यायिक खंडपीठों का गठन किया गया। न्यायालयों में रखे गए कुल 143 लंबित रेफर्ड प्रकरणों में से 120 प्रकरणों का निराकरण किया गया तथा 2,84,93,377 रुपये की राशि का अवार्ड पारित किया गया। इस प्रक्रिया से 240 व्यक्ति लाभान्वित हुए। विशेष लोक अदालत के उद्देश्य सुलभ, त्वरित एवं प्रभावी न्याय को ध्यान में रखते हुए पक्षकारों की सुविधा एवं समय की बचत के लिए तहसील सिवनी मालवा के रिक्त जिला न्यायालय के प्रकरणों का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। खंडपीठ क्रमांक-01 के पीठासीन अधिकारी प्रथम जिला न्यायाधीश श्री दिनेश कुमार नोटिया ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रकरणों का निराकरण किया। इस अभिनव पहल से पक्षकारों को लंबी दूरी तय कर न्यायालय आने की आवश्यकता नहीं पड़ी, जिससे उनके समय, श्रम एवं व्यय की उल्लेखनीय बचत हुई। तकनीक के प्रभावी उपयोग से न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित करते हुए लोक अदालत की भावना के अनुरूप आपसी सहमति से विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान किया गया।
विशेष लोक अदालत में कुल 143 रेफर्ड प्रकरण प्रस्तुत हुए, जिनमें से 120 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। विशेष लोक अदालत को सफल बनाने में अधिवक्ताओं का सहयोग सराहनीय रहा। इस अवसर पर विशेष न्यायाधीश श्री मनोज कुमार ने कहा कि विशेष लोक अदालतों के माध्यम से एन.आई. एक्ट के लंबित प्रकरणों का आपसी सहमति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में त्वरित निराकरण संभव है। इससे न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम होने के साथ-साथ पक्षकारों को शीघ्र, सरल एवं सुलभ न्याय प्राप्त होता है।
