आत्माराम यादव चीफ एडिटर हिन्द संतरी
नर्मदापुरम05,अगस्त,2026(हिन्द संतरी) वर्ष 2004 में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के द्वारा प्रदेश में आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए जिला स्तर पर होने वाली जनसुनवाई की आधिकारिक शुरुआत को वर्ष 2005 में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में सख्ती से लागू किया जाकर राज्यभर के सभी कलेक्ट्रेट और सरकारी विभागों में हर मंगलवार को लोगों की शिकायतें सुनने की व्यवस्था थी गई ओर बाद में इसे सीएम हेल्पलाइन और समाधान ऑनलाइन से जोड़ा गया। उसी क्रम मेन आज नर्मदापुरम कलेक्टर ने 171 आवेदनों की जनसुनवाई की तब से देखा जाये तो होशंगाबाद/नर्मदापुरम जिले में आ तक इस जिले के नागरिकों ने जीवनमर्या की 6 लाख 51 हजार 506 शिकायतें की है जिसमें अब भी 3 लाख छप्पन हजार 145 शिकायते सुनने के बाद अनसुनी है, क्योकि इनका अब तक निराकरन दिखाया नहीं गया है।
जिले की वेबपेज पर डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डाट कलेक्टर एक्सप्रेस डाट इन पर पर सर्च किए जाने पर कलेक्टर नर्मदापुरम द्वारा संचालित इस पेज को माना जाये तो यहा जनसुनवाइ में कलेक्टर को प्राप्त शिकायतों की संख्या आश्चर्यचकित करती है जो 3 लाख 26 हजार 575 उन्हे प्राप्त हुई है तथा लंबित शिकायतें 3 लाख 56 हजार 145 के बाद भी 2005 से कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह के कार्यकाल 7 दिसंबर 2019 तक मौजूद रहे कलेक्टरों ने 6 लाख 59 हजार 350 जिले का भ्रमण कर शिकायतों के निराकरन का काम किया है।
जंनसुनवाई हेतु देखा जाये तो एक साल में 51-52 मंगलवार होते है, अर्थात 2005 से 2019 तक 15 वर्षों में 780 अस्सी मंगलवार हुये जिसमें 13 लाख 34 हजार 226 शिकायते प्राप्त हुई। अगर दूसरी ओर देखा जाये तो इन 15 वर्षों में 5475 दिवस होते है जिसमें अवकाश के 65 दिन साल के कम कर दिये जाये तो इन वर्षों में 4500 दिवस में आने वाली समस्याओं शिकायतों की फेहरिस्त काफी लंबी अनुमानित 50 लाख के लगभग हो जाएगी? जब महीने में एक दिन मंगलवार की शिकायतें लाखों है तो पूरे सप्ताह की कलेक्टर कार्यालय सहित उसके अधीनस्थ कार्यालयों की शिकायतों की प्राप्ति ओर निपटान की स्थिति जब तक जाहिर नही होती तब तक समझा जा सकता है कि आज भी जिले के नागरिके अगर इतनी शिकायतों के साथ जी रहे है तो निश्चित रूप से शासन की कमजोरी ओर सरकार की असफलता है। यह तो एक जिले का आंकड़ा है पूरे प्रदेश के आंकड़ो की जानकारी आप सभी को शर्मसार करेगी।
जब कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह के कार्यकाल की यह स्थिति है तब वर्ष 2020 से वर्तमान कलेक्टर सोमेश मिश्रा तक की 6 वर्षों की जनसुनवाई की प्राप्त शिकायतों ओर उनके निराकृत –होने तथा लंबित रहने का आंकड़ा ओर इन छह वर्षों में कलेक्टरों के दौरे आदि का व्योरा भी चौकाने वाला होगा। चूंकि पारदर्शिता लाने के लिए जिला प्रशासन ने जनसुनवाई के आवेदनो का व्यौरा दर्ज करा दिया उसी प्रकार अगर जिले के दौरे में कलेक्टरों ओर अधिकारियों के सभी तरह के खर्च को भी उजागर कर दिया जाता तो जनता को पता चलता की उनकी फिक्र में कलेक्टरों ने कितनी राशि खर्च की है। चूंकि जनहित ओर जनता के खर्चों की अपेक्षा सरकारों ओर जिला प्रशासन द्वारा वे खर्चे फिजूल है जिसमे वीआईपी के आगमन से लेकर उनके जिले से प्रस्थान तक पूरा सिस्टम उनके लिए पलके बिछाए जनता के पैसों की बरबादी करने पर जुटा है।भले जिला प्रशासन जो भी आंकड़े दे रहा है वे सभी आधे अधूरे है ओर इस सरकार में उसके प्रशासन में हर नागरिक किसी न किसी समस्या शिकायत से पीड़ित होने से यह आंकड़े दसगुना कम ही लगते है?
