आत्माराम यादव चीफ एडिटर
नर्मदापुरम 24 अगस्त 2026 (हिन्द संतरी ) भाव जनता की सेवा करना इसीलिए कलेक्टर कार्यालय से पचास कदम दूर तहसील कार्यालय को जनता के बीच सेवा करने के लिए कलेक्ट्रेट से पांच किलोमीटर दूर रसूलिया में पहुचाया गया पर यहा तहसील पहुंचने के बाद आमजन की परेशानी खत्म होने के बजाय शुरू हो जाती है। नामांतरण, बंटवारे जैसे जरूरी प्रकरण महीनों से लंबित हैं और जब फरियादी तहसीलदार से मिलने पहुंचता है तो जवाब मिलता है—“साहब कहां गए हैं, पता नहीं… कब आएंगे, यह भी नहीं पता।”
जनता घंटों इंतजार करे, फिर मायूस होकर लौट जाए… और साहब की लोकेशन पूछने पर बाबुओं के पास भी कोई जवाब नहीं। जैसे अनेक प्रश सोशल मीडिया पर उठ रहे है जिसमें वरिष्ठ पत्रकार पंकज शुक्ला की पोस्ट का जबाव अब तक नही मिल सका है ।
तहसीलदार नहीं तो बाबुओं की भी मौज—कभी चाय-पानी, कभी बाहर का काम… आखिर जनता का काम तो इंतजार कर ही सकता है! लगता है रसूलिया की तहसील अब ‘सरकारी कार्यालय’ कम और ‘भगवान भरोसे व्यवस्था’ ज्यादा हो गई है। शिकायतें जनप्रतिनिधियों से लेकर कलेक्टर-कमिश्नर तक पहुंच चुकी हैं। पर प्रशासनिक अधिकारी शिवभक्ति में लीन है ओर पूरे माह नागद्वारी मेला पचमढ़ी मे रहे , मूंग खरीदी के लिए किसानों का आंदोलन भोपाल पहुच गया। किसान परेशान, आम व्यक्ति परेशान ॥अब लोगो को उम्मीद थी की काबड़यात्रा मे कलेक्टर एसपी लगे हुये है। अधिकारी ड्यूटी पर लगाए गए है पुलिस दिनरात न सो पा रही है ओर न ही जागना हो पा रहा है, शहर की कानून व्यवस्था भोलेनाथ के हवाले है ओर काबड़ की भीड़ जो सोमवार को हुया करती थी अब राजनैतिक लोग साधू संतों के कंधे पर बैठकर काबड़ यात्रा में व्यस्त है। अब देखना यह है कि जिम्मेदारों की नींद कब खुलती है और आमजन को तहसील में ‘साहब की तलाश’ से कब मुक्ति मिलती है
