आश्विन रावल वकुल ब्यूरो चीफ
इंदौर 13 सितम्बर 2026 (हिन्द संतरी ) समाज में धर्म, संस्कृति और मानवता की सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए गजासीन शनि धाम के अधिष्ठाता एवं धर्मगुरु श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर डॉ. दादू जी महाराज को विमुक्त घुमंतु एवं अर्द्ध घुमंतु जनजाति महासंघ द्वारा पहली बार प्रतिष्ठित ‘विमुक्त सेवा रत्न’ सम्मान से सम्मानित किया गया। महासंघ की ओर से उन्हें प्रशस्ति पत्र के साथ 51 हजार रुपये की सम्मान राशि एक प्रतीक चिन्ह प्रदान किया गया।
डॉ दादू महराज द्वारा धार्मिक एवं आध्यात्मिक के साथ साथ अनगिनत लोगों को देहदान,शरीर के अंगों को दान करने के लिए प्रेरित किया जिससे असंख्य लोगों को नया जीवन दान मिला, ग़रीबों के लिए कपड़े, भोजन, गौसेवा, स्वच्छता, पर्यावरण के लिए समाज को जगाने का उत्कृष्ट काम किया गया। संगठन की राष्ट्रीय कोर कमेटी द्वारा उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए संगठन द्वारा प्रदत्त विमुक्त सेवा रत्न के नामित किया गया डॉ. दादू जी महाराज अखिल भारतीय निर्वाणी अखाड़े से संबद्ध हैं तथा वर्ष 2016 के उज्जैन सिंहस्थ में उन्हें महामंडलेश्वर की उपाधि प्राप्त हुई। कैलिफोर्निया स्थित इंटरनेशनल ओपन यूनिवर्सिटी द्वारा उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की गई है।
वे 20 से अधिक धार्मिक एवं सामाजिक पुस्तकों के रचयिता हैं। उनके जीवन पर आधारित ‘सहज सरल सुलभ संत दादू महाराज’ नामक जीवनी का भी प्रकाशन हुआ है। ‘फिल्म टुडे’ एवं ‘WAC बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ के कवर पेज पर स्थान पाने वाले वे प्रथम संत बताए गए हैं। उन्हें लोकमान्य तिलक सेवा अवॉर्ड (2024), राष्ट्रसंत गाडगे बाबा अवॉर्ड (2023), मानव रत्न एवं गौरव सेवा रत्न सहित अनेक सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।
नर सेवा को नारायण सेवा माना
महामंडलेश्वर डॉ. दादू जी महाराज द्वारा सेंट्रल जेल में कैदियों के बीच शनि कथा का आयोजन कर उन्हें सकारात्मक एवं सुधारात्मक दिशा देने की पहल की गई। इंदौर, भोपाल, देवास और हरदा सहित विभिन्न स्थानों पर अमावस्या एवं पूर्णिमा के अवसर पर निरंतर ‘अन्नदान महादान’ अभियान चलाया जा रहा है।
उनके सेवा कार्यों के अंतर्गत 12 हजार से अधिक अशक्त एवं जरूरतमंद लोगों को वस्त्र, भोजन, स्टेशनरी और विवाह सामग्री उपलब्ध कराने का दावा किया गया है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को गोद लेकर उनके वर्षभर के शैक्षणिक एवं जीवन-यापन संबंधी खर्च का वहन भी किया जाता है। कोरोना काल में जरूरतमंदों के लिए निःशुल्क राशन, दवाइयों और सैनिटाइजर की व्यवस्था के साथ ‘जनजागृति रथ’ के माध्यम से जनजागरूकता अभियान चलाया गया।
जन्मोत्सव को बनाया सेवा का अवसर
डॉ. दादू जी महाराज पिछले 15 वर्षों से अपने जन्मदिन को सेवा दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं। इस अवसर पर वस्त्र एकत्र कर उन्हें साफ एवं प्रेस करवाने के बाद जरूरतमंदों में वितरित किया जाता है। वे स्वयं रक्तदान कर रक्तदान शिविरों का शुभारंभ करते हैं और समाज को रक्तदान के लिए प्रेरित करते हैं। जन्मदिन, स्थापना दिवस एवं अन्नकूट के अवसर पर प्रथम भोजन कुष्ठ रोगी आश्रमों में समर्पित करने की परंपरा भी उनके सेवा कार्यों का हिस्सा है। पिछले 10 वर्षों से वे कुष्ठ रोगी आश्रम के बच्चों के साथ दीपावली का पर्व मनाते आ रहे हैं।
पर्यावरण और जीवदया के क्षेत्र में भी सक्रिय
पर्यावरण एवं जीवदया के क्षेत्र में भी डॉ. दादू जी महाराज द्वारा विभिन्न पहल की गई हैं। स्वयं एवं परिजनों सहित देहदान और त्वचा दान के संकल्प के साथ 700 से अधिक लोगों से नेत्रदान के संकल्प पत्र भरवाने का अभियान चलाया गया। प्रतिवर्ष हजारों तुलसी, शमी एवं बिल्व पौधों/पत्रों का निःशुल्क वितरण तथा सैकड़ों वृक्षों का रोपण किया जाता है। ‘घर-घर गीता’ अभियान तथा कला-साहित्य के क्षेत्र में पिछले 18 वर्षों से संचालित ‘बाबा लोकनाथ सम्मान’ भी उनके सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यों में शामिल हैं। गर्मी के मौसम में बंदरों, पशु-पक्षियों के लिए अन्न, फल एवं जल की व्यवस्था तथा अंधविश्वास निवारण के लिए शनि कथाओं के माध्यम से जनजागरण किया जाता है।
महासंघ ने डॉ. दादू जी महाराज के इन कार्यों को संवेदनशील, अनुकरणीय और समाज के लिए प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि उनका जीवन सेवा, संस्कार और मानवता के प्रति समर्पण का उदाहरण है। ‘विमुक्त सेवा रत्न’ सम्मान के माध्यम से ऐसे सेवाभावी व्यक्तित्व का सम्मान करना महासंघ के लिए भी गौरव का विषय है।
