नई दिल्ली । महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में मानव और बंदर-वानर संघर्ष को कम करने के लिए नई और अनोखी पहल की घोषणा की है। इसके तहत राज्य वन विभाग ने एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर एसओपी तैयार किया है, जिसमें उपद्रवी बंदरों को सुरक्षित ढंग से पकड़कर कम से कम 10 किलोमीटर दूर वन क्षेत्रों में छोड़ने का प्रावधान किया गया है।
प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम और स्थानीय सहयोग
वन विभाग के अनुसार, राज्य में प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम तैयार की जाएगी, जो शहरों और कस्बों में उत्पन्न बंदर-वानर समस्याओं का समाधान करेगी।इन टीमों के साथ स्थानीय अनुभवी लोग भी जुड़ेंगे ताकि बंदरों को उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से लौटाया जा सके।वन विभाग का मानना है कि इससे मनुष्यों की सुरक्षा बढ़ेगी और बंदरों को स्वतंत्र जीवन जीने का अवसर मिलेगा।
आर्थिक प्रोत्साहन: बंदर पकड़ने पर मिलेगा 300-600 रुपये
प्लान के तहत प्रशिक्षित व्यक्ति को प्रति बंदर आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाएगा। 1 से 10 बंदर पकड़ने पर प्रति बंदर 600 रुपये10 से अधिक बंदर पकड़ने पर प्रति बंदर 300 रुपये, लेकिन कुल सीमा 10,000 रुपये तक निर्धारित की गई है।साथ ही यदि कोई व्यक्ति 5 तक बंदर पकड़ता है, तो उसे यात्रा खर्च के रूप में अतिरिक्त 1,000 रुपये तक भुगतान किया जाएगा।इस व्यवस्था का मकसद स्थानीय लोगों को जिम्मेदारी और सुरक्षा के साथ काम करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
मानव-बंदर संघर्ष में कमी और पर्यावरणीय संतुलन
वन विभाग के अधिकारी उम्मीद जता रहे हैं कि इस पहल से मानव बस्तियों में सुरक्षा बढ़ेगी और लोगों में बंदरों के प्रति समझ और संवेदनशीलता आएगी।विशेषज्ञों का मानना है कि उपद्रवी बंदरों को नियंत्रित करने का यह तरीका अधिक स्थायी और पर्यावरण-अनुकूल है। सरकार ने सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इस पहल में सक्रिय भूमिका निभाएं।महाराष्ट्र की यह योजना न केवल मनुष्यों की सुरक्षा बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन को भी मजबूत करेगी।
