नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन को मिली करारी हार के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। हाल ही में कांग्रेस ने अपने नेताओं और उम्मीदवारों के साथ समीक्षा बैठक में इस हार की गहन पड़ताल की। बैठक में कई उम्मीदवारों ने सीधे तौर पर राजद और तेजस्वी यादव के साथ गठबंधन को चुनाव परिणाम की जिम्मेदारी ठहराया। कुछ नेताओं ने यह भी सुझाव दिया कि भविष्य में कांग्रेस को RJD से दूरी बनाकर रणनीति तय करनी चाहिए। हालांकि अब तक किसी वरिष्ठ नेता ने गठबंधन के भविष्य पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया लेकिन सियासी माहौल गर्म है।
बीते विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को भारी झटका लगा। कुल 243 सीटों में से गठबंधन केवल 35 सीटें जीत पाया। कांग्रेस ने 71 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन केवल 6 सीटों पर सफलता मिली। वहीं, राजद ने 143 सीटों पर चुनाव लड़ा और सिर्फ 25 सीटें जीत सकी। अन्य घटक दलों का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा। इन आंकड़ों ने महागठबंधन की मजबूती और चुनावी रणनीति पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस ने इस हार का विश्लेषण करने के लिए गुरुवार को नई दिल्ली के इंदिरा भवन में समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक में 61 सीटों पर चुनाव लड़े कांग्रेस प्रत्याशी और प्रदेश के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने समूहवार चर्चा करते हुए हर समूह के 10-10 उम्मीदवारों से व्यक्तिगत बातचीत की। सूत्रों के अनुसार, अधिकांश उम्मीदवारों का मानना है कि राजद के साथ गठबंधन और सीटों के बंटवारे में देरी ने चुनाव परिणाम पर नकारात्मक असर डाला। उनके अनुसार अगर कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ती, तो बेहतर प्रदर्शन संभव था। कुछ उम्मीदवारों ने यह भी कहा कि कुछ सीटों पर आपसी टकराव और रणनीति की कमी ने हार में योगदान दिया।
हालांकि वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने मीडिया में इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की। बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय केवल कांग्रेस आलाकमान करेगा। महागठबंधन के अन्य घटक दल भी अपने स्तर पर हार की समीक्षा कर रहे हैं। राजद में प्रमंडलवार उम्मीदवारों से फीडबैक लिया जा रहा है और उन संभावित भितरघाती उम्मीदवारों की पहचान की जा रही है जिन्होंने चुनाव में विरोधियों के पक्ष में काम किया। भविष्य में उन पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक गतिविधियों के बीच बिहार विधानसभा का नया सत्र 1 दिसंबर से शुरू होने वाला है। इसमें नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी और नीतीश कुमार की सरकार सदन में अपना अनुपूरक बजट पेश करेगी। विधानसभा सत्र से पहले शनिवार को पटना में महागठबंधन की बैठक तेजस्वी यादव के आवास पर आयोजित की गई। बैठक में राजद कांग्रेस और वाम दलों के विधायक शामिल हुए और सत्र से पहले रणनीतियों पर चर्चा की गई। इस पूरी स्थिति ने बिहार की सियासत को एक बार फिर गठबंधन और प्रतिगठबंधन के बीच जंग का केंद्र बना दिया है। कांग्रेस और RJD के बीच संबंध, गठबंधन की मजबूती और आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में रणनीति को लेकर राजनीतिक हलचल जारी रहने की पूरी संभावना है।
