नई दिल्ली। दूरसंचार विभाग ने हाल ही में घोषणा की है कि भारत में निर्मित या आयातित सभी मोबाइल हैंडसेट में संचार साथी एप्लिकेशन को पहले से इंस्टॉल करना अनिवार्य होगा। विभाग ने निर्देश जारी किए हैं कि यह ऐप अंतिम उपयोगकर्ताओं के लिए डिवाइस सेटअप के समय आसानी से उपलब्ध हो और इसकी कार्यक्षमता को अक्षम या बंद न किया जा सके।वर्तमान में बाजार में उपलब्ध उपकरणों के लिए भी निर्माता और आयातक सॉफ़्टवेयर अपडेट के माध्यम से इस ऐप को इंस्टॉल करने के लिए जिम्मेदार होंगे। इस कदम का उद्देश्य मोबाइल सुरक्षा को बढ़ाना और धोखाधड़ी से बचाव सुनिश्चित करना है।
निर्देशों का उद्देश्य
दूरसंचार मंत्रालय के अनुसार, 28 नवंबर 2024 को जारी निर्देशों का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को नकली मोबाइल उपकरणों से बचाना है। साथ ही यह ऐप दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग की रिपोर्टिंग को आसान बनाएगा और संचार साथी पहल की प्रभावशीलता को बढ़ाएगा। निर्देशों के अनुसार इस कदम को 90 दिनों के भीतर लागू किया जाना है और निर्माताओं को 120 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। यह सुनिश्चित करेगा कि सभी स्मार्टफोन उपकरण नए नियमों के अनुरूप हों।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
संचार साथी ऐप को अनिवार्य करने के फैसले पर राजनीतिक चर्चा भी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि वह इस मुद्दे को सदन में उठाएंगे। सांसद कार्ति चिदंबरम ने इसे पेगासस प्लस प्लस करार दिया, जबकि राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे ‘बिग बॉस निगरानी’ का मामला बताया। सीपीआई एम सांसद जॉन ब्रिटास ने भी सरकार पर कटाक्ष किया, वहीं भाजपा सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि यह नागरिकों की डेटा सुरक्षा और डिजिटल विश्वास सुनिश्चित करेगा।
संचार साथी ऐप की विशेषताएँ
संचार साथी ऐप को सभी स्मार्टफोन उपकरणों में अनिवार्य किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम नागरिकों को नकली हैंडसेट खरीदने से रोकने के लिए आवश्यक है। यह ऐप IMEI नंबर के माध्यम से मोबाइल की प्रामाणिकता जांचने में मदद करता है।संदिग्ध या धोखाधड़ी वाले उपकरणों की तुरंत रिपोर्टिंग की सुविधा प्रदान करता है। सेकेंड-हैंड स्मार्टफोन बाजार में चोरी या ब्लैकलिस्ट किए गए उपकरणों की पहचान आसान बनाता है।
दूरसंचार साइबर सुरक्षा नियम
दूरसंचार साइबर सुरक्षा TCS नियम केंद्र सरकार को अधिकार देते हैं कि वे IMEI संख्या वाले उपकरणों के निर्माताओं को आवश्यक सहायता प्रदान कर सकें। इन नियमों के तहत, निर्माताओं के लिए सरकार द्वारा जारी निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।
नकली IMEI का खतरा
डुप्लिकेट या नकली IMEI वाले मोबाइल हैंडसेट दूरसंचार और साइबर सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। ऐसे IMEI की वजह से एक ही नंबर विभिन्न उपकरणों में सक्रिय हो सकता है जिससे निगरानी और कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है। भारत में सेकेंड-हैंड मोबाइल उपकरणों का बड़ा बाजार है जिसमें चोरी किए गए या ब्लैकलिस्ट किए गए हैंडसेट भी शामिल हैं। संचार साथी ऐप इन उपकरणों की पहचान करके उपयोगकर्ताओं को धोखाधड़ी से बचा सकता है। संचार साथी ऐप को अनिवार्य करना भारत में डिजिटल सुरक्षा और मोबाइल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल नकली उपकरणों और धोखाधड़ी से बचाव करेगा बल्कि नागरिकों को अपने स्मार्टफोन के IMEI की प्रामाणिकता जांचने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट करने में सक्षम बनाएगा।
