नई दिल्ली। एक छोटे से गांव में जन्मा लड़का अपने सपनों को पूरा करने के लिए कठिन संघर्ष से गुजरा। उसकी दुनिया ऐसी थी जहां अधिकारी बनने का सफर बेहद मुश्किल था। जैनेंद्र कुमार के पिता किसान केशव कुमार हैं और माता कुसुम देवी घर संभालती हैं। शुरुआती पढ़ाई उन्होंने गांव के सरकारी स्कूल से पूरी की।
जैनेंद्र का जीवन बचपन से ही चुनौतियों और कठिनाइयों से भरा रहा। एक घटना ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। जमीन के विवाद के कारण कुछ गांववालों ने उनके परिवार को परेशान करना शुरू कर दिया। जब जैनेंद्र के पिता ने जमीन देने से इनकार किया, तो उनके घर पर हमला किया गया, लूटपाट और आगजनी हुई। पिता के साथ मारपीट की गई और परिवार के खिलाफ झूठे केस दर्ज किए गए। जैनेंद्र और उनके परिवार को जेल जाना पड़ा। यह समय उनके लिए बेहद कठिन था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
जेल से बाहर आने के बाद जैनेंद्र ने अपनी जिंदगी को नया मोड़ दिया। जनवरी 2021 में बेल पर बाहर आने के बाद उन्होंने अधिकारी बनने का सपना पूरा करने के लिए पढ़ाई शुरू की। उन्होंने इंदौर में रहकर पूरी मेहनत से तैयारी की। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने तीन सरकारी परीक्षाओं में सफलता पाई। सबसे पहले उन्हें राज्य सेवा परीक्षा-2020 में नायब तहसीलदार के पद पर चयन मिला। इसके बाद वन सेवा परीक्षा-2020 में रेंजर के पद पर सफलता मिली, लेकिन उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। फिर राज्य प्रशासनिक सेवा परीक्षा 2022 में सहायक संचालक के पद पर चयनित हुए, जिसे भी उन्होंने ज्वाइन नहीं किया।
जैनेंद्र का असली लक्ष्य अधिकारी बनना था। इसी लक्ष्य के लिए उन्होंने निरंतर प्रयास किया और रोजाना सात से आठ घंटे पढ़ाई की। उन्होंने ऑनलाइन मॉक परीक्षा और इंटरव्यू की तैयारी भी की। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने MPPSC परीक्षा पास की। इस परीक्षा में जैनेंद्र ने बारहवीं रैंक प्राप्त की।
जैनेंद्र ने जब परिणाम देखा, तो उनके नाम के आगे अब DSP लिखा था। यह वह पल था जब उनके पिता के चेहरे पर गर्व और खुशी की चमक देखने को मिली। उन्होंने अपने पिता को फोन करके बताया, “पापा, आपका बेटा DSP बन गया है।” यह सिर्फ व्यक्तिगत सफलता का पल नहीं था, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया जो सीमित संसाधनों में रहते हुए भी अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं।
जैनेंद्र कुमार की कहानी यह दर्शाती है कि कठिनाई चाहे जितनी भी बड़ी क्यों न हो, अगर मेहनत और धैर्य साथ हो, तो कोई सपना असंभव नहीं। झूठे मामलों और जेल की कठिनाइयों के बावजूद जैनेंद्र ने अपने परिवार का दर्द मिटाने और अपने सपनों को पूरा करने का संकल्प नहीं छोड़ा। आज वह केवल DSP नहीं बने, बल्कि लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन गए हैं।
उनकी सफलता यह संदेश देती है कि संघर्ष और चुनौतियों से डरना नहीं चाहिए। अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी बाधा मनुष्य को रोक नहीं सकती। जैनेंद्र कुमार की कहानी यह साबित करती है कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, संघर्ष और मेहनत के बल पर हर मुश्किल को पार किया जा सकता है और सफलता पाई जा सकती है।
