नई दिल्ली। जब कोई यात्री ट्रेन का टिकट बुक करता है और वेटिंग दिखाई देती है, तो अक्सर यह चिंता होने लगती है कि क्या टिकट कंफर्म होगा या नहीं। खासकर त्योहारों, शादी या भीड़भाड़ वाले रूट पर वेटिंग लिस्ट कई बार इतनी लंबी हो जाती है कि टिकट कंफर्म होने की उम्मीद कम लगती है। हालांकि, भारतीय रेलवे ने पहले ही कुछ आंकड़े और नियम साझा किए हैं, जिनके आधार पर यात्री यह अनुमान लगा सकते हैं कि उनका वेटिंग टिकट कंफर्म होगा या नहीं।
वेटिंग टिकट पर सीमा
रेलवे ने यह स्पष्ट किया है कि किसी भी श्रेणी में कुल सीटों के 25 प्रतिशत से अधिक वेटिंग टिकट जारी नहीं किए जाएंगे। उदाहरण के लिए, यदि एक कोच में 100 सीटें हैं, तो अधिकतम 25 वेटिंग टिकट ही जारी किए जा सकते हैं। हालांकि, महिला यात्रियों और दिव्यांगों को इस नियम में विशेष छूट दी जाती है। इस नियम का मुख्य उद्देश्य ट्रेनों में टिकट बुकिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।
वेटिंग टिकट कंफर्म होने के आंकड़े
रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, औसतन 21 प्रतिशत यात्री टिकट बुक करने के बाद उसे कैंसिल कर देते हैं। इसके अलावा, लगभग चार से पांच प्रतिशत यात्री टिकट बुक करने के बाद भी ट्रेन में यात्रा नहीं करते। इसके अलावा रेलवे के इमरजेंसी कोटे में बची सीटें भी बाद में वेटिंग सूची को मिल जाती हैं। इन आंकड़ों के आधार पर कहा जा सकता है कि कुल मिलाकर 25 प्रतिशत सीटें खाली होकर वेटिंग टिकट को कंफर्म कर सकती हैं।
एक कोच और पूरी ट्रेन में कंफर्म होने की संभावना
उदाहरण के तौर पर एक स्लीपर कोच में कुल 72 सीटें होती हैं। औसत आंकड़ों के अनुसार, लगभग 25 प्रतिशत सीटें खाली होकर वेटिंग टिकट को कंफर्म कर सकती हैं, यानी करीब 18 सीटें। इसका मतलब यह है कि एक स्लीपर कोच में वेटिंग टिकट कंफर्म होने की अच्छी संभावना रहती है। यदि किसी ट्रेन में दस स्लीपर कोच हैं, तो कुल 180 सीटें कंफर्म होने की संभावना में आती हैं। यह गणित एसी कोचों पर भी लगभग समान रूप से लागू होती है, हालांकि एसी कोचों में सीटें कम होने और मांग अधिक होने की वजह से कंफर्म होने के चांस थोड़े कम होते हैं।
कंफर्मेशन के चांस किन बातों पर निर्भर करते हैं
वेटिंग टिकट कंफर्म होने की संभावना कई कारकों पर निर्भर करती है। त्योहारों और शादी के मौसम में ट्रेनों में भीड़ बढ़ जाती है, जिससे वेटिंग लंबी हो जाती है और टिकट कंफर्म होने की संभावना कम हो जाती है। व्यस्त रूट्स पर भी वेटिंग जल्दी भर जाती है। इसके अलावा, कोच का प्रकार भी महत्वपूर्ण होता है। स्लीपर कोच में सामान्यत: कंफर्म होने के चांस बेहतर रहते हैं, जबकि एसी कोच में कम सीट और अधिक मांग के कारण संभावना कम होती है।
टिकट कंफर्म होने के चांस कैसे बढ़ाएं
यात्री कुछ उपाय अपनाकर वेटिंग टिकट कंफर्म होने की संभावना बढ़ा सकते हैं। सबसे पहले, जितनी जल्दी संभव हो टिकट बुक करें। इससे वेटिंग कम होने की संभावना रहती है। इसके अलावा, कम व्यस्त रूट चुनने और ट्रैवल डेट में लचीलापन रखने से भी फायदा होता है। नियमित रूप से वेटिंग स्टेटस चेक करते रहना भी महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
रेलवे के द्वारा साझा किए गए आंकड़े और नियम यात्रियों को वेटिंग टिकट के कंफर्म होने की संभावना का अनुमान लगाने में मदद करते हैं। यदि आप टिकट बुक करते समय इन आंकड़ों को ध्यान में रखेंगे, तो यह अंदाजा लगाना आसान होगा कि टिकट कंफर्म होगा या नहीं। आने वाले समय में ये नियम यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाएंगे।
