भोपाल । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई का उपयोग अब केवल तकनीकी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि इसका प्रभाव पुलिसिंग और अपराध नियंत्रण पर भी पड़ने वाला है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हाल ही में हुई डीजीपी-आईजी कान्फ्रेंस में मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने फ्यूचर रेडी पुलिसिंग 2047 के अंतर्गत एआई के उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि एआई का इस्तेमाल पुलिस को अपराधों का पूर्वानुमान लगाने अपराधियों की पहचान करने और अपराधों की रोकथाम में मदद कर सकता है। इस प्रकार का मॉडल देशभर की पुलिसिंग के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत हो सकता है।
एआई और अपराध की पहचान
कैलाश मकवाणा ने अपने प्रजेंटेशन में ‘क्राइम प्रिवेंशन और डिटेक्शन’ विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि एआई पुलिस को पूर्वानुमान प्रेडिक्शन करने में मदद करेगा। उदाहरण स्वरूप एआई मॉडल पहले के अपराधों घटनाओं और परिस्थितियों के आंकड़ों का विश्लेषण करके यह भविष्यवाणी कर सकता है कि किस स्थान और समय पर अपराध की संभावना अधिक है। इस प्रकार पुलिस को किसी क्षेत्र विशेष में बढ़ती अपराध दर या संदिग्ध गतिविधियों को समय रहते पहचानने में मदद मिल सकती है।
ट्रैफिक और सड़क दुर्घटनाओं का पूर्वानुमान
एआई का उपयोग पुलिस को ट्रैफिक प्रबंधन और सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम में भी मदद करेगा। एआई आधारित मॉडल ट्रैफिक डेटा का विश्लेषण कर यह अनुमान लगा सकते हैं कि किन स्थानों पर सड़क दुर्घटनाएं होने की संभावना है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी समय विशेष में वाहनों की संख्या अधिक है या ट्रैफिक जाम हो रहा है तो एआई पुलिस को पूर्व सूचना दे सकता है, जिससे पुलिस त्वरित कार्रवाई कर सके और दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
प्रेडिक्टिव पुलिसिंग एक नया दृष्टिकोण
भारत में पुलिसिंग के क्षेत्र में प्रेडिक्टिव पुलिसिंग का मॉडल अपनाने पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य अपराधों को होने से पहले ही रोकना है। एआई के माध्यम से अपराधियों की पहचान उनके संभावित स्थानों की पहचान और घटनाओं की पूर्व चेतावनी मिल सकती है। इसके परिणामस्वरूप पुलिस को घटनाओं को रोकने का समय मिलेगा जिससे कानून व्यवस्था में सुधार हो सकेगा। इसके अलावा एआई का उपयोग अपराधियों की पहचान करने उनके ट्रेंड और पैटर्न को समझने में भी मदद कर सकता है। इससे अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने और अपराधों की गति को कम करने में सहूलियत मिलेगी।
एआई आधारित डेटा एनालिसिस: एक महत्वपूर्ण उपकरण
पुलिस विभाग में एआई के एक अन्य महत्वपूर्ण उपयोग के रूप में डेटा एनालिसिस सामने आ रहा है। यह पुलिस को अपराध से जुड़े विभिन्न प्रकार के डेटा को इकट्ठा करने उसका विश्लेषण करने और उसे समझने में मदद करेगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी क्षेत्र में अपराध की एक विशेष प्रवृत्ति या पैटर्न है तो एआई के जरिए इसे जल्द ही पहचाना जा सकता है। इससे पुलिस को अपराधों के समाधान में तेजी आएगी और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी।
भविष्य की पुलिसिंग डिजिटल तकनीक और एआई का समावेश
मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने फ्यूचर रेडी पुलिसिंग 2047 पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाले समय में पुलिसिंग पूरी तरह से डिजिटल और तकनीकी दृष्टिकोण से सुसज्जित होगी। एआई और अन्य डिजिटल तकनीकों के समावेश से पुलिस की कार्यप्रणाली में भी बदलाव आएगा। अपराधियों के खिलाफ स्मार्ट तरीके से लड़ने समय पर कार्रवाई करने और अपराध की रोकथाम में यह तकनीकी मदद कारगर साबित होगी।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई का इस्तेमाल पुलिसिंग में एक क्रांतिकारी कदम हो सकता है, जो न केवल अपराधों की पहचान और रोकथाम में मदद करेगा बल्कि अपराधी के ट्रेंड और पैटर्न का विश्लेषण करके भविष्य में होने वाली घटनाओं का पूर्वानुमान भी कर सकेगा। इससे पुलिस को और अधिक स्मार्ट तेज और प्रभावी रूप से अपराधियों से निपटने में मदद मिलेगी। ‘प्रेडिक्टिव पुलिसिंग और एआई आधारित तकनीकों के समावेश से पुलिसिंग प्रणाली को और अधिक प्रभावी और कुशल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है।
