नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का दौरा भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। पुतिन भारत आ रहे हैं 25 साल पुराने भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी की वर्षगांठ के अवसर पर और 23वें द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। उनका यह पहला दौरा है, यूक्रेन पर रूस के युद्ध शुरू होने के बाद। दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर पुतिन भारत आ रहे हैं और बातचीत के बाद बड़े ऐलान और समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। इसके बाद संयुक्त मीडिया बयान जारी किया जाएगा।
मुख्य समझौतों में 2030 तक आर्थिक सहयोग कार्यक्रम शामिल है। इसके तहत दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य और मीडिया सहित कई क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत किया जाएगा। रूसी पक्ष ने कहा है कि वह बढ़ते व्यापार घाटे और भारत की चिंताओं को दूर करने के लिए तैयार है। इसके लिए द्विपक्षीय लेन-देन को बाहरी दबाव से बचाने का भी प्रस्ताव रखा गया है। 2024 में दोनों देशों का व्यापार 12 प्रतिशत बढ़कर 63.6 अरब अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है।
सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण समझौते होने की संभावना है। भारत और रूस ब्रह्मोस मिसाइल के अगले संस्करण के विकास पर चर्चा कर सकते हैं। इसमें हल्का वायु-लॉन्च मॉडल और लंबी दूरी वाला संस्करण शामिल हैं। इसके अलावा लंबी दूरी की वायु-से-वायु मिसाइलों और भारत की S-400 मिसाइलों की योजना पर भी बातचीत होगी। ब्रह्मोस मिसाइल पहले ही ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल हो चुकी है और इसके निर्यात की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
रक्षा सहयोग के अंतर्गत RELOS यानी आपसी लॉजिस्टिक समर्थन समझौता भी चर्चा का मुख्य विषय होगा। इसके तहत दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सैन्य अड्डों, बंदरगाहों और आपूर्ति केंद्रों का उपयोग कर सकेंगी। रूस भारत को अपना सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान SU-57 देने के लिए तैयार है। भविष्य में S-500 मिसाइल प्रणाली पर सहयोग और युद्धपोत निर्माण जैसी योजनाओं पर भी विचार किया जाएगा।
ऊर्जा क्षेत्र में मॉड्यूलर रिएक्टर और तेल क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौते होने की संभावना है। इसके अलावा औद्योगिक सहयोग, नवाचार तकनीक, खनन, परिवहन, अंतरिक्ष और स्वास्थ्य जैसे बड़े परियोजनाओं की समीक्षा भी इस दौरे के दौरान की जाएगी।
भारत और रूस के नेताओं द्वारा संयुक्त रूप से इंडिया-रूस व्यापार मंच को संबोधित किया जाएगा। इसमें निवेश के अवसर, उत्पादन साझेदारी और तकनीकी सहयोग पर चर्चा होगी। दोनों देश अंतरराष्ट्रीय मंचों जैसे संयुक्त राष्ट्र, SCO, G20 और ब्रिक्स में सहयोग बढ़ाने के मुद्दों पर भी विचार साझा करेंगे। रूस ने कहा है कि वह 2026 में ब्रिक्स अध्यक्षता संभालने की तैयारी में भारत के साथ समन्वय करने के लिए उत्सुक है।
इस दौरे का कुल असर भारत की सुरक्षा, आर्थिक और रणनीतिक ताकत को बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है। रक्षा क्षेत्र में समझौतों के साथ-साथ आर्थिक साझेदारी और व्यापारिक सहयोग भी दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देगा। पुतिन का यह दौरा भारत-रूस संबंधों को अगले दशक के लिए मजबूत आधार देने वाला माना जा रहा है।
