हरियाणा। के जींद जिले में स्थित चौधरी रणबीर सिंह यूनिवर्सिटी (सीआरएसयू) में छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार और अशोभनीय संदेश भेजने के गंभीर आरोपों ने पूरे परिसर में हड़कंप मचा दिया है। छात्राओं द्वारा लगाए गए इन आरोपों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन प्रोफेसरों को निलंबित कर दिया है। आरोप है कि इन अध्यापकों ने कुछ छात्राओं को मोबाइल पर अनुचित और अशोभनीय संदेश भेजे, जिससे छात्राओं में भय और आक्रोश का माहौल बन गया। मामला सामने आने के बाद छात्र संगठनों और अन्य विद्यार्थियों ने भी परिसर में विरोध प्रदर्शन किया था।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब विश्वविद्यालय प्रशासन को 27 नवंबर को एक गुमनाम पत्र प्राप्त हुआ। इस पत्र में विस्तार से लिखा गया था कि एक प्रोफेसर द्वारा छात्राओं को अश्लील और अनुचित संदेश भेजे जा रहे हैं। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया था कि छात्राएं इस मामले में सामने आने से डर रही हैं, जबकि कुछ छात्राओं ने कथित रूप से भेजे गए संदेशों के प्रमाण भी उपलब्ध कराए थे। शिकायत मिलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आ गया और तत्काल एक जांच समिति का गठन किया गया।
जांच समिति ने प्रारंभिक स्तर पर कुछ मोबाइल संदेशों और उपलब्ध करवाए गए प्रमाणों का परीक्षण किया। समिति ने संबंधित शिक्षकों को जांच पूरी होने तक घर पर रहने के आदेश जारी किए और उनकी सभी शिक्षण और प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ तुरंत रोक दीं। प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने तीनों अध्यापकों को निलंबित कर दिया और आगे की जांच जारी रखने के आदेश दिए।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रामपाल राणा ने मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि छात्राओं की सुरक्षा और सम्मान विश्वविद्यालय की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि बिना नाम के प्राप्त शिकायत पत्र की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने कोई देरी नहीं की। आरोप लगाने वाली छात्राओं की पहचान गुप्त रखी गई है और उनके बयान सुरक्षित वातावरण में दर्ज किए जा रहे हैं। कुलपति ने कहा कि प्रारंभिक जांच में कुछ तथ्य सामने आए हैं, जिनके आधार पर संबंधित अध्यापकों को निलंबित किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आगे की जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो विश्वविद्यालय प्रशासन न केवल कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा बल्कि मामला पुलिस को सौंपकर कानूनी प्रक्रिया भी शुरू करवाएगा।
डॉ. राणा ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय अपने परिसर में किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार, उत्पीड़न या अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं करता। शिकायत मिलते ही प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि छात्राओं को किसी भी प्रकार का दबाव न महसूस हो और वे सुरक्षित महसूस करें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए जल्द ही एक विशेष जागरूकता अभियान भी शुरू किया जाएगा। इसके अलावा महिला प्रकोष्ठ और एंटी-हैरासमेंट सेल को और अधिक सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले के सामने आने के बाद परिसर के छात्रों में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई छात्र संगठनों ने इस घटना की निंदा की और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। छात्रों के विरोध के बाद ही प्रशासन ने जांच प्रक्रिया को तेज किया था। विरोध कर रहे छात्रों का कहना था कि विश्वविद्यालय शिक्षण का पवित्र स्थान है और यहां ऐसी घटनाओं को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन जांच समिति की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। रिपोर्ट आने के बाद यह तय होगा कि निलंबित शिक्षकों पर आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले ने न केवल विश्वविद्यालय में बल्कि पूरे जिले में चर्चा को जन्म दिया है, और लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी होगी।
