चंडीगढ़ । पंजाब सरकार ने गृह मंत्रालय से पत्र प्राप्त होने के बाद राज्य के राजभवन का नाम बदलकर अब लोक भवन पंजाब कर दिया है। यह निर्णय एक महत्वपूर्ण कदम है जो पंजाब सरकार द्वारा उठाया गया है। गृह मंत्रालय की ओर से 25 नवंबर 2025 को पंजाब राजभवन के नाम परिवर्तन से संबंधित पत्र प्राप्त हुआ था जिसके बाद 4 दिसंबर 2025 को आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया गया। इस नाम परिवर्तन को लेकर पंजाब के राज्यपाल और यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने वीरवार शाम पंजाब राजभवन में आयोजित एक समारोह के दौरान इसकी जानकारी दी। उन्होंने इस बदलाव का स्वागत करते हुए इसे भारतीय लोकतांत्रिक भावना और जनता की भागीदारी की आत्मा के रूप में बताया। इस अवसर पर चार राज्यों उत्तराखंड झारखंड असम और नागालैंड का स्थापना दिवस भी मनाया गया जिसमें इन राज्यों के सांस्कृतिक और सामाजिक योगदान को भी सम्मानित किया गया।
केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद नाम परिवर्तन
केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास और अन्य प्रमुख आवासों के नाम बदलने के फैसले के बाद पंजाब राजभवन का नाम भी बदलने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। अब इसे लोक भवन पंजाब के नाम से जाना जाएगा। यह नाम परिवर्तन भारतीय लोकतंत्र की भावना को और मजबूत करेगा जो जनता की भागीदारी और सरकार के बीच पारदर्शिता को बढ़ावा देता है। राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने इस नामकरण के साथ ही भारतीय एकता और विविधता की अहमियत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोक भवन नाम भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और उसकी जनता के प्रति सम्मान को प्रदर्शित करता है। इस बदलाव से यह संदेश मिलता है कि सरकार और राज्यपाल के कार्यालय का संबंध सीधे जनता से है और यह लोकतंत्र की सच्ची भावना को दर्शाता है।
संविधानिक बदलाव का प्रतीक लोक भवन
राजभवन का नाम बदलकर लोक भवन रखना देशभर में हो रहे एक बड़े बदलाव का हिस्सा है। यह बदलाव न केवल पंजाब के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारतीय लोकतंत्र के मूल्यों को केंद्रित करता है। राज्यपाल ने इस मौके पर सरदार वल्लभभाई पटेल की ऐतिहासिक भूमिका का भी उल्लेख किया जिन्होंने भारत की 562 रियासतों के एकीकरण और ब्रिटिश शासन की विभाजनकारी नीतियों को विफल किया।
स्थापना दिवस समारोह में सांस्कृतिक समृद्धि का प्रदर्शन
पंजाब लोक भवन में आयोजित इस विशेष समारोह में एक भारत श्रेष्ठ भारत पहल के तहत उत्तराखंड झारखंड असम और नागालैंड का स्थापना दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में इन राज्यों के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया।उत्तराखंड ने प्रसिद्ध नंदा देवी पालकी नृत्य और लोकगीत बेड़ू पाको बारामास की प्रस्तुति दी जो पहाड़ी जीवन और प्राकृतिक सौंदर्य को दर्शाता है। झारखंड ने अपनी जनजातीय और कृषि परंपराओं पर आधारित नृत्य प्रस्तुत किए जबकि असम ने बिहू नृत्य और पारंपरिक बंगुरुंबा नृत्य प्रस्तुत किया। नागालैंड की ओर से बांस नृत्य और विभिन्न नागा जनजातियों की वीरता को प्रदर्शित करने वाले वारियर डांस प्रस्तुत किए गए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में असम और नागालैंड के नृत्य शैलियों का विशेष फ्यूजन भी पेश किया गया जो भारत की विविधता और सांस्कृतिक सौहार्द का प्रतीक था।
सार्वभौमिक भागीदारी
कार्यक्रम में पंजाब सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे जिनमें भारत के अतिरिक्त सालिसिटर जनरल सत्य पाल जैन चीफ सेक्रेटरी एच. राजेश प्रसाद राज्यपाल के प्रमुख सचिव विवेक प्रताप सिंह गृह सचिव मनीप सिंह बराड़ वित्त सचिव दिप्रवा लाकड़ा और डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा शामिल थे। इन अधिकारियों ने इस महत्वपूर्ण आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया।
पंजाब राजभवन का नाम बदलकर लोक भवन पंजाब रखे जाने से भारतीय लोकतंत्र और सरकारी संस्थाओं में जनता की भागीदारी को नया दृष्टिकोण मिलेगा। यह बदलाव न केवल भारतीय लोकतंत्र के मूल्यों को उजागर करता है बल्कि भारतीय संस्कृति और विविधता की भी महानता को दर्शाता है। यह कदम भविष्य में अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकता है जहां सरकारी संस्थाओं और जनता के बीच एक सशक्त और पारदर्शी संबंध स्थापित करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।
