नई दिल्ली। भारत में सोना हमेशा से भरोसेमंद निवेश का प्रतीक रहा है, लेकिन डिजिटल दौर में निवेश का तरीका भी बदल गया है। असली सोना खरीदकर उसे सुरक्षित रखने की झंझट से बचने के लिए निवेशक तेजी से गोल्ड म्यूचुअल फंड्स की ओर रुख कर रहे हैं। ये फंड्स सीधे फिजिकल गोल्ड में निवेश नहीं करते बल्कि गोल्ड ईटीएफ एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में पैसा लगाते हैं। इसका लाभ यह है कि निवेशकों को सोने के दामों के उतार-चढ़ाव के अनुसार रिटर्न मिलता है और सबसे खास बात यह कि इनमें निवेश के लिए डीमैट अकाउंट की आवश्यकता नहीं होती, जिससे यह आम निवेशकों के लिए बेहद आसान विकल्प बन जाता है।
गोल्ड म्यूचुअल फंड्स क्यों हैं लोकप्रिय
निवेशक केवल ₹500 जैसी छोटी राशि से SIP शुरू कर सकते हैं। फिजिकल गोल्ड में लगने वाले 5-15% तक के मेकिंग चार्ज की कोई कटौती नहीं होती। निवेशकों को 99.5% शुद्ध डिजिटल गोल्ड का भरोसा मिलता है। SEBI द्वारा नियंत्रित होने के कारण यह सुरक्षित निवेश विकल्प हैं। खरीदना और बेचना आसान है पैसा कुछ ही दिनों में सीधे बैंक खाते में आ जाता है।
निवेश करते समय ध्यान रखने योग्य बातें
फंड हाउस का एक्सपेंस रेशियो आमतौर पर 0.5% से 1% तक होता है। 24 महीने से पहले बेचने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है और 24 महीने बाद बेचने पर टैक्स 12.5% + सेस लगता है। निवेश शुरू करने के लिए ऑनलाइन KYC पूरा करना होता है भरोसेमंद AMC चुनना होता है और SIP या एकमुश्त राशि के जरिए निवेश करना होता है।
गोल्ड म्यूचुअल फंड्स गोल्ड ईटीएफ की तुलना में न्यूनतम निवेश की दृष्टि से कम बाध्यकारी हैं और नेट एसेट वैल्यू के आधार पर बाजार बंद होने के बाद खरीदे जाते हैं। इसलिए छोटे और नए निवेशकों के लिए यह सोने में डिजिटल निवेश का सबसे आसान और सुरक्षित विकल्प बन चुका है।
