सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी आज आधे अधूरे मन से मनाएंगे स्थापना दिवस
नर्मदापुरम/05,दिसम्वर,2025(हिन्द संतरी)/ सम्पूर्ण भारत में सरकार इक्कीसवी सदी को अमृत महोत्सव के रूप में माना रही है किन्तु नियम कानून बनाने की बात हो या सुप्रीम कोर्ट के आदेश मानने की कुछ मायने में यहाँ सरकारी अधिकारी अंग्रेजी हुकूमत की मानसिकता लिए हिटलर शाही कानून अपनाकर दो नियम दो विधान का पालन कर आज भी होमगार्ड सैनिकों पर लागू किये हैं। आज 6 दिसम्बर को समूचे देश में होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा स्थापना दिवस के रूप में भव्य आयोजन किये जाने है, जिसके तहत नर्मदापुरम में प्रात: 09:45 बजे कार्यालय होमगार्ड लाईन में मुख्य अतिथि के रूप में राज्य सभा सांसद श्रीमती माया नारोलिया उपस्थित रहकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगी किन्तु होमगार्ड सैनिकों को न्याय दिलाकर क्या वे सुप्रीम कौर्ट के उनके पक्ष में किये गए आदेशों का पालन कराकर अपने सूबे से सभी होमगार्ड सैनिकों के साथ न्याय कर सकेंगी, यह यक्ष सवाल खड़ा हुआ है।
वर्ष 2011 देश की सर्वोच्च न्यायपालिका के द्वारा मध्यप्रदेश होमगार्ड सैनिकों के पक्ष में पारित आदेश के बावजूद भी होमगार्ड विभाग के अधिकारीयों द्वारा अंग्रेजी हुकूमत की मानसिकता लिए इन होमगार्ड सैनिकों के लिए 16 नए नियम-कानून बनाकर इन्हें अधिकारों से वंचित रखा वहीँ नये-पुराने सैनिकों में विसंगतियों के चलते पुराने जवानों के साथ अन्याय कर उनके मौलिक अधिकार हकों का हनन किया है जिसे बार बार प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह सहित वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जो गृह मंत्री हैं उन्हें अवगत कराया गया किन्तु अधिकारीयों सहित सरकार ने मध्यप्रदेश होमगार्ड जवानों की समस्या को तवज्जो नही दिया| सभी जानते है कि होमगार्ड जवान जिन्होंने 35 से 40 वर्ष तक देश की आतंरिक सुरक्षा कानून व्यवस्था डियूटी, लोकतंत्र महापर्व लोकसभा, विधानसभा चुनाव डियूटी,वर्षों से समय-समय पर राज्य में बाढ़ आपदा के समय स्वयं की जान जोखिम में डालकर हजारों लोगों की जान-माल सहित पशुधन की रक्षा की,वैश्विक कोरोना महामारी में रात-दिन अपनी सेवाएं दी उनके साथ अगर अन्याय हो और वेतन सहित सेवानिवृत्ति में अन्यों की तरह 62 वर्ष की जगह 60 में चलता करे तो यह उनके साथ घोर अन्याय है ।
देखा जाए तो मध्यप्रदेश होमगार्ड संगठन के जवान सेंट्रल प्रोविंसेज एंड बरार होमगार्ड एक्ट (1947 ,1947 का 15वा) के अनुसार पुलिस बल की कमी पूर्ति करते हुए,पुलिस विभाग के आरक्षक के समान आरक्षक के लिए निर्धारित सभी ड्यूटी पूर्ण निष्ठा से करते आ रहे है, परंतु इनकी सेवाकाल के दौरान इन होमगार्ड जवानों को वेतन भत्ते जी पी एफ कटौती के साथ सेवा निवृति के बाद वृद्धावस्था में जीवनयापन हेतु ग्रेच्युटी और पेंशन की सुविधाएं एवं सेवानिवृत्ति की आयु सीमा 62 वर्ष में न कर 60 वर्ष में किया जाकर इन्हें इनके मानवीय मौलिक अधिकारों से वंचित रखा गया है। प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी हो या प्रदेश के मुख्यमंत्री हो आखिर वे सभी आजादी के बाद इस संस्था के जवानों के समर्पण योगदान को क्यों भूले हुए है जो पुलिस के साथ कंधे से कन्धा लगाकर, यातायात विभाग में सहभागिता, क्षेत्रीय परिवहन विभाग हो, माइनिग विभाग, बाढ़ आपदा प्रबंधन हो, जेल हो हर जगह कानून व्यवस्था डियूटी, लोकतंत्र महापर्व लोकसभा,विधानसभा चुनाव डियूटी, वैश्विक कोरोना महामारी डियूटी, स्वयं की जान जोखिम में डाल कर हजारों लोगों की जान-माल सहित पशुधन की रक्षा करते है|
क्या सरकार ने या जो जिम्मेदार अधिकारी इन होमगार्ड सैनिकों को आपदा दूत मानकर सेवाएं लेते है वे कभी इनकी पारिवारिक परिस्थितियों में झाँक कर आये है की ये किस प्रकार समर्पित रहने के बाद कैसे अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं? जब होमगार्ड विभाग के अधिकारी स्वयं राज्य सरकारों के राज्य कर्मचारी बन गये और शासन से प्राप्त सारी सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं तब होमगार्ड का सैनिक जवान जो विभाग की रीढ़ है उन्हें आजादी के 78 वर्ष बाद भी संम्पूर्ण भर्ती प्रक्रिया परेड रायफल ट्रेनिंग के बाद भी स्वयंसेवी क्यों मानते हैं और 60 वर्षों तक बंधुआ मजदूरों की तरह सेवा लेकर उनके हाल पर छोड़ देते हैं वर्दी के नाम पर राज्य सरकारों शासन द्वारा मिलने वाली सारी सुविधाओं से भी वंचित रखा गया है, अगर ये भूले से कोर्ट की शरण ले लें तो भी विभाग उनके आदेशों की अवहेलना क्यों करता है जिस प्रकार वर्ष 2011 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना 14 वर्षों से आज तक की जाकर इन होमगार्ड के सैनिकों को न्याय से वंचित रखा है, क्या आज स्थापना दिवस पर किसी नेता-अधिकारी का जमीर जागेगा जो उन्हें उनका अधिकार दिला सके|
