वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि श्रीमती दीक्षित के विरुद्ध लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर प्रकृति के हैं और इनसे स्पष्ट रूप से मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम-3 का उल्लंघन होता है। इस नियम के अनुसार कोई भी शासकीय सेवक अपने पद, दायित्व और कर्तव्य के अनुरूप आचरण करने के लिए बाध्य होता है। आरोप यह दर्शाते हैं कि अधिकारी ने न केवल पद का दुरुपयोग किया बल्कि विभागीय गरिमा को भी ठेस पहुंचाई।
यही कारण है कि शासन ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील नियम, 1966 के नियम-9 के तहत उन्हें तत्काल निलंबित करने का निर्णय लिया। यह नियम उन मामलों में लागू होता है जिनमें प्रारंभिक साक्ष्य यह संकेत देते हैं कि कर्मचारी का कार्य आचरण गंभीर अनियमितता के दायरे में आता है और तत्काल कार्रवाई आवश्यक है।
निलंबन अवधि में मुख्यालय ग्वालियर होगा
निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि श्रीमती मंदाकिनी दीक्षित का मुख्यालय आबकारी आयुक्त कार्यालय, ग्वालियर निर्धारित किया गया है। इस अवधि में वे बिना पूर्व अनुमति अपने मुख्यालय से अनुपस्थित नहीं रह सकेंगी। सरकारी नियमों के अनुसार निलंबन अवधि में अधिकारी को जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।
ठेकेदार की वीडियो में क्या था आरोप?
देवास के ठेकेदार दिनेश मकवाना ने आत्महत्या से पहले रिकॉर्ड किए वीडियो में दावा किया था कि आबकारी विभाग की अधिकारी उनसे अवैध पैसों की मांग कर रही थीं जिसके कारण वे मानसिक रूप से परेशान थे। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला गंभीर विवाद का विषय बन गया। परिजनों और स्थानीय व्यापारियों ने भी इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
विभाग और शासन सतर्क
सरकारी सूत्रों के अनुसार, मामले की स्वतंत्र जांच के लिए प्रारंभिक स्तर पर प्रक्रियाएँ शुरू कर दी गई हैं। शासन का कहना है कि वीडियो में लगाए गए आरोपों की तथ्यात्मक जांच की जाएगी और जांच के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय होगी।
राज्य में बढ़ती सख्ती
मध्यप्रदेश सरकार हाल के वर्षों में अधिकारियों के आचरण को लेकर सख्त रुख अपनाती दिख रही है। भ्रष्टाचार और अवैध वसूली से जुड़े मामलों में त्वरित निलंबन और विभागीय जांच शुरू करना सरकार की प्राथमिकता बताई जा रही है। यदि जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाते हैं तो श्रीमती दीक्षित के खिलाफ न केवल विभागीय बल्कि कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। फिलहाल वे निलंबन अवधि में ग्वालियर मुख्यालय पर पदस्थ रहेंगी और जांच पूरी होने का इंतजार करेंगी।
